खनन घोटाला : 8 घंटे, 100 सवाल, ईडी अफसरों की पूछताछ में IAS बी चंद्रकला ने दिए ऐसे जवाब

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लखनऊ। हमीरपुर में हुए अवैध खनन मामले में आईएएस बी चंद्रकला से बुधवार को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के दफ्तर में आठ घंटे तक गहन पूछताछ की गई। लगभग करीब आधा दर्जन अधिकारियों की टीम ने चंद्रकला से खनन घोटाले से जुड़े राज उगलवाने की कोशिश की तो वह बड़े अफसरों द्वारा जारी किए गये आदेशों का हवाला देते हुए खुद को बेगुनाह करार देती रहीं।

पूछताछ के दौरान उन्होंने अपना बयान विवेचक को सौंपा। ईडी के अफसरों ने उनकी संपत्तियों, आईटीआर, खनन पट्टों की लीज व आय के अन्य स्रोतों के बारे में जानकारी हासिल की। चंद्रकला ने ईडी को इस बाबत तमाम शासनादेश की प्रतियां भी मुहैया कराई। साथ ही अपनी चल-अचल संपत्तियों का पूरा ब्योरा भी दिया। चंद्रकला शाम 5.50 बजे ईडी के दफ्तर से बाहर निकलीं।

अपनी वकीलों के साथ पहुंची थी चंद्रकला, पूछताछ में किए सौ से ज्यादा सवाल

बुधवार को चंद्रकला अपने वकीलों के साथ सुबह आठ बजे ईडी दफ्तर आईं जिसके बाद उनसे पूछताछ का सिलसिला शुरू कर दिया गया। ईडी ने उनके कार्यकाल में आवंटित किए गये खनन पट्टों को लेकर सौ से ज्यादा सवाल किए। इस दौरान ईडी के ज्वाइंट डायरेक्टर राजेश्वर सिंह कार्यालय में मौजूद थे। ईडी के अफसरों ने चंद्रकला के सामने सभी लीज के दस्तावेज रखकर पूछताछ शुरू की तो वह खुद को बेकसूर बताने लगीं। उन्होंने कहा कि खनन के पट्टे देने का आदेश राज्य सरकार की ओर से आता था। उनको हाईकोर्ट द्वारा खनन के पट्टे आवंटित करने की ई-टेंडर प्रक्रिया को अपनाने का कोई आदेश भी नहीं मिला था।

पट्टों को आवंटित करने की प्रक्रिया कैबिनेट निर्धारित करती थी। हालांकि जब उनसे बाकी पट्टों के रिनीवल और अवैध खनन की रोकथाम को लेकर सवाल किए गये तो उन्होंने चुप्पी साध ली। करीब आठ घंटे तक चली पूछताछ के बाद शाम छह बजे उनको जाने दिया गया। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो चंद्रकला घोटाले के असली गुनहगारों को बचाने का प्रयास कर रही हैं जिसकी वजह से उनको जल्द दोबारा पूछताछ के लिए बुलाया जाएगा।

क्या बोलें ज्वाइंट डायरेक्टर राजेश्वर सिंह, ईडी लखनऊ

आईएएस बी चंद्रकला ने अपनी सारी संपत्तियों की जानकारी मुहैया करा दी है। उनके दस साल के आईपीआर (चल-अचल संपत्तियों का विवरण) के साथ उनकी सारी संपत्तियों की भी गहन पड़ताल की जाएगी जिसके बाद उनको दोबारा पूछताछ के लिए तलब किया जाएगा। तत्कालीन कैबिनेट द्वारा पट्टों के आवंटन की प्रक्रिया निर्धारित करने के फैसलों की जांच भी की जाएगी। अवैध खनन से होने वाली कमाई को कहां निवेश किया गया है, इसकी गहराई से जांच की जाएगी।

यह है मामला 

हमीरपुर में हुए करोड़ों के खनन घोटाले में सीबीआइ ने दो जनवरी को एफआइआर दर्ज कर पांच जनवरी को आरोपितों के ठिकानों पर छापेमारी की थी। इस कार्रवाई के बाद ईडी ने सीबीआई की एफआईआर को आधार बनाकर तत्कालीन डीएम हमीरपुर बी.चंद्रकला व सपा एमएलसी रमेश मिश्र समेत 11 आरोपितों के खिलाफ मनी लांडिंग का केस दर्ज किया था, जिसकी जांच की जा रही है।

हमीरपुर जिलाधिकारी के पद पर की गई थी पोस्टिंग

दरअसल, योगी सरकार के सत्ता में आने से पहले अखिलेश यादव सरकार में आईएएस बी. चन्द्रकला की पोस्टिंग हमीरपुर जिलाधिकारी के पद पर की गई थी। आरोप है कि इस आईएएस ने जुलाई 2012 के बाद हमीरपुर जिले में 50 मौरंग के खनन के पट्टे किए थे। ई-टेंडर के जरिए मौरंग के पट्टों पर स्वीकृति देने का प्रावधान था लेकिन बी. चन्द्रकला ने सारे प्रावधानों की अनदेखी की थी। वर्ष 2015 में अवैध रूप से जारी मौरंग खनन को लेकर हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की गई थी। हाईकोर्ट ने 16 अक्टूबर 2015 को हमीरपुर में जारी सभी 60 मौरंग खनन के पट्टे अवैध घोषित करते हुए रद कर दिए थे।

11 नामजद और उन पर लगी धाराएं

तत्कालीन जिलाधिकारी बी. चंद्रकला, तत्कालीन खनन अधिकारी मोइनुद्दीन, माइनिंग क्लर्क राम आसरे प्रजापति, एमएलसी रमेश मिश्रा, पट्टाधारी दिनेश कुमार मिश्रा, अंबिका तिवारी, संजय दीक्षित, सत्यदेव दीक्षित, रामअवतार सिंह, करन सिंह और आदिल खान शामिल हैं। इसके अलावा अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ आईपीसी की धारा 120 बी, 483 और 420 के साथ ही प्रिवेंशन आफ करप्शन एक्ट की धारा 13 के तहत केस दर्ज किया गया है।

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