यौन संबंध में खलल पड़ने पर 4 बच्चों और एक महिला की हत्या की, कोर्ट ने दी सजा-ए-मौत

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भिंड. मध्यप्रदेश के भिंड शहर के वीरेंद्र नगर इलाके में चार छोटे-छोटे बच्चों और एक महिला की हत्या के मामले में अंकुर उर्फ नीतेश दीक्षित को द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश एमएल राठौर ने दोषी घोषित करे हुए उसे सजा-ए-मौत सुनाई है। कोर्ट ने कहा कि विरल से भी विरलतम हत्याकांड है। सिर्फ यौन संबंध में खलल पड़ने पर उसने एक-एक करके 4 बच्चों की हत्या की और फिर महिला की भी हत्या कर दी। ऐसे इंसान को जिंदा नहीं रखना चाहिए।

14 मई, 2016 को शहर के वीरेंद्र नगर में रामबाबू शुक्ला के घर के कमरे में पलंग पर बहू रीना, जमीन पर नातिन छवि, महिला व रीना की भतीजी अंबिका की लाश पड़ी थी। इनके नाक से झाग आ रहा था। गले कटे हुए थे। दूसरे में रूम में उनके साले राजकुमार के बेटे गोलू की लाश पड़ी थी। उसके भी हाथ पैर बंधे थे। इस सनसनीखेज हत्याकांड के बाद पुलिस ने जांच शुरू की तो किचिन के सिंक में ग्लास में नशीला पदार्थ होने का संदेह हुआ।

एफएसएल अधिकारी ने भी घटनास्थल से फिंगर प्रिंट उठाए। मृतिका के मोबाइल की कॉल डिटेल निकलवाई। सामने आया कि उसकी बात जिस नंबर पर सबसे ज्यादा हुई वह अंकुर उपयोग कर रहा था। इसके बाद अंकुर से पूछताछ की गई तो उसने बताया कि वह मृतका रीना शुक्ला के मकान में किराए से रहने वाली रोली भदौरिया के बच्चों को ट्यूशन पढ़ाने जाता था। इसी दौरान मृतिका से उसके संबंध बन गए थे।

संबंध बनाने से पहले बच्चों को नींद की गोली खिलाते थे
13-14 मई की रात भी वह मृतिका के घर गया था। अंकुर ने नर्सिंग कोर्स किया है, इसलिए उसने रीना को पहले नींद की गोलियां दी जो उसके आने से पहले रीना बच्चों को खिलाकर सुला देती थी। घटना वाली रात को भी रीना ने अंकुर को मिस कॉल देकर बुलाया था। जब वह रीना के घर पहुंचा और संबंध बना रहा था तभी गोलू ने दोनों को देख लिया। इसके बाद अंकुर ने गोलू की हत्या कर दी, तभी चिल्लाने की आवाज सुनकर लड़कियां जागने लगीं तो एक के बाद एक उनकी भी हत्या करता गया। यह सब देखकर रीना विरोध कर रही थी तो अंकुर ने उसका भी गला रेत कर मार डाला।

तीन महीने तक किसी वकील ने नहीं लिया था केस
इस घटना से पूरे शहर ही नहीं बल्कि प्रदेश में सनसनी फैल गई थी। इस घटना से समाज में इतना व्यापक आक्रोश था कि जिला न्यायालय के अधिवक्ताओं ने आरोपी अंकुर दीक्षित की पैरवी करने से इंकार कर दिया। करीब ढाई से तीन महीने तक आरोपी के बचाव में कोई वकील नहीं आया। ऐसे में न्यायालय ने आरोपी अंकुर के लिए विधिक सहायता कार्यालय से अधिवक्ता की नियुक्ति की।

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