आखिर कलैक्टर को जान से मारने की धमकी देने की क्यों आई स्थिति

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बैतूल जिले में आदिवासी समाज के उत्तेजित होने के पीछे कहीं नक्सलवाद 

बैतूल, ( ANI NEWS INDIA रामकिशोर पंवार ): मध्यप्रदेश एवं महाराष्ट्र की सीमा से लगे आदिवासी बाहुल्य बैतूल जिले में जल – जमीन – जंगल के नाम पर पोषित नक्सलवाद से बैतूल जिला प्रशासन कैसे अनभिज्ञ हो सकता है ,
जब जिले से जाने वाले आधा दर्जन कलैक्टर अपनी गोपनीय रिर्पोट में अंडर लाइन करके इस बात का जिक्र कर चुके है कि जिले में सक्रिय कुछ एनजीओ एवं पत्रकार जिले के आदिवासियो के नाम पर बने संगठन के बैनर तले सीधे – साधे आदिवासी युवको को प्रशासन के खिलाफ आन्दोलित करने का काम बड़े पैमाने पर करते रहते है। जिले में आदिवासी समाज के लोगो को बड़ी संख्या में जल – जमीन – जंगल के नाम पर एकत्र करके लाना एवं प्रशासन पर दबाव बनाना कोई आज की घटना नहीं है।
जिले में नक्सलवाद के नाम पर दिया जा रहा वैमनस्ता का ज़हर – नशा अब लोगो को उत्तेजित, आन्दोलित , आक्रोषित कर चुका है कि अब पढ़े – लिखे युवक तक को अपने आक्रोष के नशे में सोशल मीडिया के सबसे चर्चित प्लेटफार्म फेसबुक पर बैतूल जिला कलैक्टर शशांक मिश्रा को जान से मार डालने की धमकी वाला पोस्ट डालने के लिए विवश होना पड़ा। यह वही युवक है जो पिछले माह जिले की तथाकथित फर्जी जाति प्रमाण पत्र पर सासंद बनी श्रीमति ज्योति धुर्वे के खिलाफ भूख हड़ताल पर बैठा था। बैतूल जिला मुख्यालय पर लगातार 15 दिनो तक तथा मुख्यमंत्री निवास पर 7 दिनो भूख हड़ताल करने वाले युवक को पुलिस ने देर रात गिरफ्तार किया लिया लेकिन अपनी गिरफ्तारी के पूर्व भी युवक अपनी मांग पर अड़ा है।
उसका कहना है कि 1 अप्रेल 2017 को जब सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर राज्य स्तरीय छानबीन समिति ने सासंद को फर्जी घोषित कर उसे निरस्त कर दिया लेकिन पिछले एक साल से बैतूल कलैक्टर शशांक मिश्रा सासंद का जाति प्रमाण पत्र के मामले में छानबीन समिति की सिफारीशो की अवहेलना कर रहे है यदि मेरे द्वारा फेसबुक पर दी गई चेतावनी के बाद भी जिला कलैक्टर ने कोई कार्रवाई सासंद ज्योति धुर्वे के खिलाफ नहीं की तो उसे वह जिला कलैक्टर मार डालेगा और स्वंय भी मर जाएगा। निमीष सरियाम नामक युवक ने अपने आप को जिला प्रशासन या अन्य लोगो द्वारा तथाकथित रूप से नशेड़ी / मोहरा बनाने के आरोपो को दर किनार करते हुए युवक ने एक बार फिर वही बात को दोहराई है कि यदि कलैक्टर को मार डालने के अपराध में उसे फांसी की सजा भी हो जाती है तो कोई बात नहीं।
बैतूल जिले की आदिवासी सासंद के मामले में पिछले एक साल से पेडिंग पड़ी कार्रवाई के मामले में कलैक्टर ने कहा कि कार्रवाई चल रही है लेकिन एक साल हो गए छानबीन समिति के आदेश को आज दिनांक तक चुनाव आयोग को सासंद के जाति प्रमाण पत्र को फर्जी घोषित किए कलैक्टर बैतूल द्वारा राजनैतिक दबाव के चलते कोई कार्रवाई नहीं की गई जिसके चलते सासंद का जाति प्रमाण पत्र का मामला एक साल से पेडिंग पड़ा है और फर्जी जाति प्रमाण पत्र पर सासंद बनी श्रीमति ज्योति धुर्वे आज भी सासंद का पद लाभ ले रही है। सवाल बार – बार यह उठ रहा है कि आखिर युवक को कलैक्टर बैतूल को जान से मार डालने की धमकियां बार – बार क्यों दोहरानी पड़ रही है!
युवक स्वस्थ एवं मानसिक रूप से भी स्वंय को स्वस्थ बता रहा है। ऐसे में यह बात समझ में क्यों नहीं आ रही है कि वह ऐसा क्यूं कर रहा है। जिला कलैक्टर कहते है कि इस बात की जांच की जा रही है कि उसके पीछे कौन लोग है ! इस नाम का युवक है भी या नही! बैतूल कलैक्टर के इस तरह के बचकाना सवाल ही उनकी योग्यता पर प्रश्रचिन्ह लगाते है। 15 दिनो तक कलैक्टर दिन में चार बार उसी सड़क से आना – जाना करते थे जहां पर युवक सासंद की जाति को लेकर भूख हड़ताल पर बैठा था। जिले के सासंद के सामने वह युवक एक दो नहीं एक दर्जन बार ज्ञापन देने के बहाने / शिकायत करने के बहाने मिला उसके बाद भी कलैक्टर जैसे जिम्मेदार व्यक्तिया पदाधिकारी का यह कहना कि सासंद के मामले को लेकर उन्हे धमकी देने वाला व्यक्ति है भी या नहीं ! इस बात की तथा उसके पीछे कौन लोग है इसकी जांच की जाएगी।
कलैक्टर बैतूल को धमकी देने एवं पूर्व विधायक सुखदेव पांसे को लेकर आपत्तिजनक पोस्ट डालने के दो मामलो में बैतूल जिले में आदिवासी समाज से निमिष सिरयाम एवं पंवार समाज से लतीश पंवार पर आई टी एक्ट के तहत मामले दर्ज किए गए। जिसमें बैतूल कोतवाली पुलिस ने निमिष सरियाम नामक युवक को न्यायालय में पेश किया। बैतूल के रहने वाले आदिवासी युवक निमिष सरियाम ने फेसबुक पर सांसद ज्योति धुर्वे के जाति प्रमाण पत्र के मामले में कार्रवाई न करने का आरोप लगाते हुए कलैक्टर को जान से मारने के साथ.साथ खुद भी आत्महत्या कर लेने की पोस्ट डाली थी।
इसके अलावा केंद्रीय गृह मंत्री और सांसद के खिलाफ  भी आपत्तिजनक पोस्ट डाले थे। इस मामले में कलेक्टर शशांक मिश्र ने पीआरओ और एसडीएम के माध्यम से पुलिस को शिकायत की। देर शाम पुलिस ने आरोपी युवक के खिलाफ  धारा 506 तथा आईटी एक्ट 66 के तहत केस दर्ज कर गिरफ्तार कर आरोपी को सीजेएम कोर्ट में पेश किया जहां से उसे जिला जेल भेज दिया। युवक का जेल जाते – जाते यही कहना था कि यदि बैतूल कलैक्टर फर्जी अपराधी सांसद को जेल नहीं भिजवाते है, असली आदिवासी को उसका हक नहीं दिलाते हैं तो एक महीने के अंदर मैं कलैक्टर को मारने के बाद मैं मर जाऊंगा! जेल जाने से पूर्व युवक ने देश के गृह मंत्री एवं पूर्व भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह द्वारा पहली बार ज्योति धुर्वे को सासंद की टिकट दिलवाने को लेकर श्री सिंह एवं सांसद के खिलाफ  भद्दे कमेंट्स किए थे।
23 अक्टुबर १९८६ को जुन्नारदेव छिन्दवाड़ा मध्यप्रदेश में जिन्मे निमिष सरियाम वर्ष 2014 में दैनिक जागरण भोपाल में मार्केटिंग मैनेजर की नौकरी ज्वाइन की। जहाँ एक ओर जिले की सासंद श्रीमति ज्योति स्व. धुर्वे की ने रायपुर छत्तिसगढ़ से राजनीति शास्त्र में एम ए किया है वही दुसरी ओर निमिष सरियाम ने भी वह बीयू भोपाल से राजनीति शास्त्र में स्नातक डिग्री ले रखी है। हरदा के नवोदय जैसे विद्यालय का छात्र यदि अपनी फेस बुक पर सांसद ज्योति धुर्वे को लेकर कलैक्टर को जान से मार डालने की धमकी वाली बात पर आज भी कायम है। निमिष सरियाम को जेल भेजे जाने के बाद समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष अनिल सोनी ने फेसबुक पर निमिष सरियाम द्वारा की पोस्ट पर गंभीरता से विचार करने की बात कही है।
श्री सोनी ने कहा निमिष सरियाम द्वारा की गई पोस्ट पर सांसद ज्योति धुर्वे के आदिवासी नहीं होने की स्थिति में उन्हें हटाने को लेकर सवाल उठाया है व उचित है या नहीं इसकी जांच की जाना चाहिए। श्री सोनी ने कहा ज्योति धुर्वे के जाति प्रमाण पत्र को लेकर छानबीन समिति ने प्रमाण पत्र को फर्जी साबित कर दिया है। इसके बाद उन्हें पद से नहीं हटाया जा रहा है। जिससे मूल आदिवासी को सांसद बनने से रोके जाने का सवाल निमिष ने उठाया है। प्रशासन निमिष पर कार्रवाई करता है तो भविष्य में आदिवासी समाज में विद्रोह पैदा हो सकता है और यह रास्ता नक्सलियों के विचार की ओर ले जाएगा। बैतूल कलैक्टर की आशंका को तब बल मिल मिलता है जब पूरे घटनाक्रम के पीछे की कहानी की ओर ध्यान दे।
निमिष सरियाम के धरना प्रदर्शन एवं भुख हड़ताल कार्यक्रम में जगत काका के एक एक मोहरे ने अपनी पूरे समय अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई। 15 दिनो तक जिला मुख्यालय एवं 7 दिनो तक सीएम निवास पर निमिष सरिरयाम नामक युवक द्वारा रखे गए इस धरना – प्रदर्शन – भुख हड़ताल कार्यक्रम को जिले में आदिवासी समाज में नक्सलवाद का बीज बोने वाले कुछ ऐसे संगठनो का सहयोग मिला जो आदिवासी के नाम पर सरकारी एवं गैर सरकारी अनुदान पर  जिले के भोले भाले आदिवासी समाज को भड़काने एवं बरगलाने का काम कर रहे है। जिले में इस पूरे मामले को लेकर मीडिया के एक धड़े पर भी सवालिया निशान उठने लगे है जो अकसर प्रायोजित खबरो को परोसने का काम करते चले आ रहे है।
बार – बार सवाल यही उठता है कि आखिर पढ़े – लिखे आदिवासी युवक निमिष सरियाम को बैतूल जिला कलैक्टर को जान से मार डालने की धमकी देने की स्थिति क्यों आ पड़ी। निमिष सरियाम ने बताया कि उसने चन्द्रशेखर आजाद की जीवनी पढऩे के बाद यह कदम उठाया। चन्द्रशेखर आजाद ने क्रांतिकारी कदम तब उठाया जब अग्रेंजो ने लोगो पर अत्याचार करके के सारे रिकार्ड तोड़ डाले। आजाद भारत में चन्द्रशेखर आजाद की सोच का जन्म लेना कहीं न कहीं शासक और शासन की कार्यशैली अग्रेंजो जैसे हो गई है।
मध्यप्रदेश शासन की जाति प्रकरणो का निपटारा करने वाली राज्य स्तरीय छानबीन समिति द्वारा जब बैतूल जिले की तथाकथित आदिवासी महिला सासंद श्रीमति ज्योति स्व. प्रेम धुर्वे को छानबीन समिति के द्वारा अयोग्य घोषित किया गया साथ ही फर्जी जाति प्रमाण पत्र के मामले में जाति प्रमाण पत्र निरस्त करके उसे जप्त करके राज्य निर्वाचन आयोग को श्रीमति ज्योति धुर्वे के प्रमाण पत्र के मामले में की गई कार्रवाई से अवगत करवाने का आदेश जारी किया गया। अप्रेल 2017 से लेकर आज दिनांक तक कलैक्टर बैतूल द्वारा छानबीन समिति के आदेश का पालन न किए जाने से सासंद श्रीमति ज्योति स्व. प्रेम धुर्वे को मिले जीवनदान के बदले में बैतूल जिला कलैक्टर को बैतूल जिले में मिली प्रशासनिक छूट के पीछे कहीं न कहीं भाजपा बैतूल कलैक्टर को मिला मुक्त संरक्षण ही निमिष सरियाम को आक्रोषित कर गया। आक्रोषित युवक कहता है कि वह कलैक्टर को मार डालने के बाद वह स्वंय भी अपनी जान दे देगा।
सवाल यह उठता है कि यदि कहीं क्षुब्ध युवक निमिष सरियाम ने कलैक्टर के बदले स्वंय की जान ले ली तो उन माँ – बाप का क्या हो गया ! जिनके नौजवान बेटे ने फर्जी सासंद के जीवनदान के लिए अपनी जान दे दी ! जान देना या जान लेना दोनो ही दण्डनीय अपराध की श्रेणी में आता है। कुछ जानकार लोगो का मानना है कि बीते एक साल में बैतूल जिले में ऐसा कुछ हुआ है जिसके चलते पढ़े – लिखे आदिवासी युवक निमिष सरियाम को अपनी सोच बदलने पड़ी। विचारो में परिवर्तन कहीं न कहीं नक्सलवाद की ओर लोगो को धकेल रहा है। बैतूल जिले में नक्सलवाद की शुरूआत जल – जमीन – जंगल के बहाने हुई और नक्सलवाद ने ऐसे ही आदिवासी युवको एवं व्यक्तियों को अपना हथियार बनाया जो व्यवस्था से नाराज चल रहे थे।
बैतूल जिले में प्रशासन के खिलाफ बीते 15 वर्षो में 15 हजार से अधिक ऐसी घटनाएं घटित हो चुकी है जो कहीं न कहीं जिले में नक्सलवाद को पनपने देने के लिए जिम्मेदार बनी हुई है। यूं तो बैतूल जिला कलैक्टर की कार्यप्रणाली को लेकर कई बार सवाल उठे है। आखिर पर्दे के पीछे की कहानी ऐसी क्या है कि जिला कलैक्टर सिर्फ चंद रायचंदो की राय के अनुसार काम कर रहे है। अकसर जिला कलैक्टर उन लोगो के ईदगिर्द ही घुमते नज़र आते है जो विवादो के केन्द्र रहे है। सोशल से लेकर प्रशासनिक कार्यो में बार – बार वही चेहरे दिखाई देते है जो सर्वाधिक बदनाम कहे जाते है।
जिला कलैक्टर के बारे में लोगो की आम राय यह भी बनती जा रही है कि वे किसी गरीब आम आदमी के साथ कम ऐसे लोगो के साथ अकसर दिखाई देते है जिनकी छबि शोषक एवं शोषणकत्र्ता के संरक्षक के रूप में रही है। जिले के बारे में कहा जाता है कि इस समय में जिले में पिछले दरवाजो से ऐसे लोगो को सरकारी समितियों में सदस्य के रूप में नामजद करने का दौर चल पड़ा है जो स्वजाति या चाटुकार की श्रेणी में आते है। ऐसे ही लोग जिला प्रशासन एवं जिला कलैक्टर की छबि को धूमिल करने एवं निमिष सरियाम जैसे लोगो को उत्तेजित या आक्रोषित करने का काम कर रहे है।

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