राहुल गांधी ने दिया चुनाव आयोग को जवाब, लिखा-नहीं किया आचार संहिता का उल्‍लंघन

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आदर्श आचार संहिता उल्लंघन के नोटिस पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने चुनाव आयोग को 11 पन्नों में जवाब भेजा है. राहुल गांधी ने कहा है कि जब शहडोल में उन्होंने कहा था कि मोदी सरकार ने ऐसा कानून बनाया है जिसमें आदिवासियों को गोली मारने की अनुमति दी गई है.

तो उन्होंने आचार संहिता का उल्लंघन नहीं किया था. राहुल ने चुनाव आयोग से यह भी कहा है कि वह आचार संहिता के उल्लंघन से जुड़ी शिकायतों का निपटारा करते वक्त निष्पक्ष रहे और कांग्रेस के खिलाफ भेदभावपूर्ण रवैया न अपनाए.

आचार संहिता उल्लंघन के आरोपों पर राहुल गांधी ने कहा कि उन्होंने भारतीय वन कानून में प्रस्तावित संशोधन को अपने एक भाषण में सरल ढंग से समझाने की कोशिश कर रहे थे. राहुल गांधी की दलील है कि वन कानून 1927 की धारा 66 में संशोधन के सरकारी प्रस्ताव पर अपने भाषण की रौ में बोल रहे थे. राहुल गांधी ने कहा कि उनकी मंशा अपुष्ट तथ्यों का बयान कर लोगों को बहकाने की नहीं थी.

गौरतलब है कि 23 अप्रैल को मध्य प्रदेश के शहडोल में राहुल ने अपने एक बयान में दावा किया था कि नरेन्द्र मोदी सरकार ने एक ऐसा नया कानून बनाया है जिसमें आदिवासियों को गोली मारने की इजाजत दी गई है. राहुल के इस बयान पर चुनाव आयोग ने उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया था.

कांग्रेस अध्यक्ष ने आयोग को यह भी बताया कि बीजेपी ने उन्हें लोकसभा चुनाव में प्रचार करने से रोकने के लिए उनके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी क्योंकि वह एक राजनीतिक पार्टी के प्रमुख हैं और उसके स्टार प्रचारक भी हैं. राहुल ने कहा कि उनकी आलोचना मोदी सरकार की नीतियों, कार्यक्रमों और कार्यों तक ही सीमित थी.

कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि चुनाव लोकतंत्र में लोकप्रिय भावनाओं की अभिव्यक्ति है और जब तक विचारों के स्वतंत्र प्रचार-प्रसार की अनुमित नहीं दी जाती है चुनाव का उद्देश्य पूरा नहीं होगा. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि सरकारी नीतियों की खामियों और खासियतों को जनता के सामने रखना और उन्हें उनपर निर्णय लेने के लिए कहना लोकतंत्र के लिए जरूरी है.

निष्पक्ष, गैर-भेदभावपूर्ण दृष्टिकोण रखे चुनाव आयोग
राहुल गांधी ने चुनाव आयोग से कहा कि आयोग पार्टियों के खिलाफ की गई शिकायतों पर कार्रवाई करते वक्त निष्पक्ष, गैर-भेदभावपूर्ण, गैर-मनमाना और संतुलित दृष्टिकोण अपनाए. उन्होंने चुनाव प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह सहित बीजेपी नेताओं द्वारा दिये गए कई बयानों का हवाला दिया, जिनमें कई नेताओं ने ‘आपत्तिनजक’ शब्दों का इस्तेमाल किया था.


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