कूट रचित दस्तावेजो पर मिलने लगे राष्ट्रपति पुरूस्कार, दलित को मिला पुरूस्कार तो मची हाय – तौबा

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बैतूल // रामकिशोर पंवार
बैतूल जिले में जैसे ही पाढर की बहुचर्चित छात्रावास अधीक्षिका सुश्री विद्या कैथवास को राष्ट्रपति पुरूस्कार के लिए कूट रचित दस्तावेजो का मामला सामने आया, दलित समाज की ओर से एक आरोपो की गुगली स्वर्ण समाज की ओर फेकी गई। 
जानकार सूत्रो के अनुसार बैतूल जिले में कार्यरत तथाकथित भीम सेना ने जिले के पूर्व सासंद स्वर्गीय विजय कुमार खण्डेलवाल के पीए एवं वन संरक्षक कार्यालय , वन विभाग बैतूल में पदस्थ श्री अश्विनी दुबे की जीवन संगनी एवं बैतूल के एक सरकारी स्कूल की प्रधान पाठिका श्रीमति वंदना दुबे को मिले राष्ट्रपति पुरूस्कार की जांच की मांग कर डाली है। भीम सेना की ओर से जारी बयान में कहा गया कि सवर्ण समाज के लोगो को दलित समाज की महिला सुश्री विद्या कैथवास को मिला राष्ट्रपति पुरूस्कार हजम नहीं हो रहा है , ऐसे में जरूरी है कि यदि राष्ट्रपति पुरूस्कार के लिए कूटरचित दस्तावेजो का उपयोग होता है तो जांच सिर्फ बहन सुश्री विद्या कैथवास की ही क्यों हो !
इधर सुश्री विद्या कैथवास के प्रकरण की जांच में यह तथ्य सामने आया है कि पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से लेकर अनेक लोगो के द्वारा सफल छात्रावास के संचालन एवं सामाजिक कार्यो के लिए तथाकथित सम्मानित एवं पुरूस्कृत सुश्री विद्या कैथवास के मामले में शासकीय कन्या माध्यमिक शाला के तत्कालिन प्रधान पाठक श्री के सी बारंगे को मध्यप्रदेश शासन के भोपाल स्थित लोक शिक्षण विभाग की आयुक्त जयश्री किवायत द्वारा नोटिस जारी कर उनका पक्ष जानना चाहा है कि उनके द्वारा जब एक भी दिन स्कूल पढ़ाने नहीं पहुंची सुश्री विद्या कैथवास को कैसे  उनके द्वारा कैसे वर्ष २०१५ एवं २०१६ में कक्षा 8 वी के सामाजिक विज्ञान विषय के अध्यापन के चलते सौ प्रतिशत छात्रो के उत्तीण होने का प्रमाण पत्र जारी किया गया था। नोटिस जारी होने के 15 दिनो के भीतर प्रधान पाठक केसी बारंगे से जवाब मांगा है।
दलित को मिला पुरूस्कार तो मची हाय – तौबा , ऐसे में स्वर्ण प्रधान पाठिका की भी हो जांच !
उक्त आरोपो के संदर्भ में संतोषप्रद प्रमाणिक जवाब न मिलने की स्थिति उनके विरूद्ध मध्यप्रदेश सिविल सेवा अधिनियम १०६५ के नियम ३ का उल्लघंन है। प्रधान पाठक के सी बारंगे पर आरोप है कि उसके द्वारा किया गया कूट रचित दस्तावेजी प्रकरण के चलते एक अपात्र शिक्षिका को राष्ट्रपति पुरूस्कार मिला। राष्ट्रपति / राष्ट्रीय शिक्षक जैसे शीर्ष पुरूस्कार के अवैध लाभ पहुंचाने का गंभीर आरोप है। मजेदार बात पूरे प्रकरण में यह सामने आई है कि जिसने पुरूस्कार प्राप्त किया है और जिस चयन समिति ने पुरूस्कार के लिए अपात्र शिक्षिका का चयन किया गया उसे आयुक्त लोक शिक्षण विभाग की ओर से अभी तक कोई पत्र नहीं जारी किया गया है। मध्यप्रदेश शासन के लोक शिक्षण विभाग के दोहरे चरित्र को उजागर करने वाली भीम सेना ने यह सवाल उठाते हुए कई गंभीर आरोप लगाए है।

चयन समति की क्या जवाबदेह नही !

पत्रकारो से चर्चा करते हुए भीम सेना की ओर से जानकारी दी गई कि  राष्ट्रपति पुरूस्कार के लिए जिला स्तर पर पांच लोगो की चयन समिति होती है जिसमें जिला कलैक्टर बैतूल, उप संचालक / आयुक्त / सहायक आयुक्त एसी ट्रायवल,  जिला शिक्षा अधिकारी बैतूल,  प्राचार्य उत्कृष्ट विद्यालय बैतूल में शामिल है। सवाल यह उठता है कि चयन समिति ने वर्ष २०१५ – २०१६ में राष्ट्रपति अवार्ड के लिए मंगवाये गए आवेदन पत्रो में शामिल लोगो को अपात्र घोषित कर अपात्र शिक्षिका का चयन करना गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है ऐसी स्थिति में चयन समिति में शामिल शासकीय सेवको के विरूद्ध मध्यप्रदेश सिविल सेवा अधिनियम १०६५ के नियम ३ का उल्लघंन का अपराधिक मामला दर्ज क्यों नहीं होना चाहिए!

पुरूस्कार बरसते है विद्या कैथवास पर

सबसे अधिक समय तक धपोड़ा एवं बाद कमला नेहरू कन्या आश्रम पाढर की छात्रावास अधीक्षिका रही सहायक शिक्षिका सुश्री विद्या कैथवास पर पुरूस्कारो की बारीश होना आम बात है। उसे राष्ट्रपति पुरस्कार सबसे बाद में मिला। इसके पूर्व उसे पुष्प प्रदर्शनी में राष्ट्रीय स्तर पर सात बार पुरस्कृत किया गया है। इसके साथ ही महात्मा ज्योतिबा फूले नेशनल फेलोशिप अवार्ड वर्ष 2015 और सावित्री बाई फूले नेशनल फेलोशिप अवार्ड वर्ष 2016 भी मिल चुका है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी आश्रम के बेस्ट संचालन को लेकर पुरस्कृत कर चुके हैं। सहायक शिक्षक की पुरस्कार श्रेणी में पाढर कमला नेहरु कन्या आश्रम की अधीक्षिका विद्या कैथवास का भी चयन हुआ है।

तिकड़ी में अगड़ी हुई विद्या कैथवास

बैतूल जिले से तीन शिक्षकों ने अपना नामांकन इस पुरस्कार के लिए कराया था। जिसमें श्रीमति शंकुतला पचौरी का भी नाम था। बताया जाता है कि आखरी समय में चयन समिति ने राष्ट्रपति पुरस्कार के लिए जिले से कैथवास के नाम पर मुहर लगा दी। पांच सितंबर २०१६ को शिक्षक दिवस पर सुश्री विद्या कैथवास को दिल्ली में राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित किया गया। सामाजिक सरोकार के चलते राष्ट्रपति पुरस्कार के लिए चयनित शिक्षिका कैथवास का कहना था कि सामाजिक सरोकार के चलते पुरस्कार के लिए उसका चयन हुआ था। उनके द्वारा समाजहित, शिक्षा में गुणात्मक सुधार, पर्यावरण, धार्मिक, राज्य और राष्ट्रहित के उल्लेखनीय कार्य किए गए थे।

विद्या कैथवास बोली मैने आवेदन किया था, अपात्र थी तो मेरा चयन क्यों किया गया !

अब पूरे मामले में अपनी घेराबंदी के बाद प्रधान पाठक केसी बारंगे एवं पाठर की स्वर्गीय कमला नेहरू बालिका छात्रावास की अधीक्षिका सुश्री विद्या कैथवास ने मोर्चा खोल दिया है। सुश्री विद्या कैथवास ने तो साफ तौर पर चयन समिति पर ही ऊंगलियां उठाते हुए पूरे मामले के लिए चयन समिति को ही दोषी करार दिया है। सुश्री कैथवास का कहना था कि मेरे द्वारा यदि फर्जी दस्तावेज प्रस्तुत किए गए थे तो उनकी उस समय जांच एवं भौतिक सत्यापन किया जाना चाहिए था। चयन समिति में कलैक्टर जैसे जिम्मेदार अधिकारी है क्या उन्होने उन छात्रो से पुछा था कि मैने उन्हे कक्षा 8 वी में सामाजिक विज्ञान विषय पढ़ाया था या नहीं ! भले कलैक्टर ने इस संदर्भ में पुछताछ नहीं की लेकिन बाकी पूरी चयन समिति क्यों मेरे दस्तावेजो पर आंख मुंद कर मोहर लगा गई!

एक भी दिन पढ़ाया नहीं और ले आई राष्ट्रपति पुरूस्कार !

कौन सा पुरूस्कार कैसे मिलता है यह विद्या कैथवास से ज्यादा कोई नहीं जानता! अभी तक जिले में सर्वाधिक राष्ट्रीय पुरूस्कार से सम्मानित हो चुकी सुश्री विद्या कैथवास पर उसकी ही सहकर्मी शिक्षिकाओं ने गंभीर आरोप लगाते हुए यह तक कहा कि एक भी दिन स्कूल जाकर बच्चों का क ख ग न पढ़ा सकी महिला को शिक्षा के क्षेत्र में मिला राष्ट्रीय पुरूस्कार अपनी मर्यादा को खो चुका है। ऐसे लोगो के चयन के बाद योग्य एवं सक्षम व्यक्ति या महिला कभी भी ऐसे पुरूस्कारो के लिए अपना नाम तक प्रस्तुत नहीं करेगी।

दलित और बाह्मण की लड़ाई में पंवार समाज को बलि का बकरा बनाना कहां का न्याय !

इधर पूरे मामले में तब नया मोड आ गया जब बैतूल जिले में पिछडे समाज में दुसरे नम्बर की सबसे बड़ी बहुसंख्यक पिछड़ी जाति में शामिल पंवार समाज संगठन की ओर से समाज के कुछ जागरूक लोग पूर्व प्रधान पाठक शासकीय माध्यमिक शाला पाढर श्री केसी बारंगे के पक्ष में कूद पड़े। पंवार समाज के लोगो ने आरोप लगाया कि पूरा मामला यूं उजागर नहीं होता यदि  राष्ट्रपति पुरूस्कार के लिए अनुसूचित जाति एवं सवर्ण ब्राह्मण समाज की शिक्षिका   दोनो ही अपने – अपने आवेदन प्रस्तुत करके अपनी – अपनी दावेदारी प्रस्तुत नहीं करते। पंवार समाज के एक प्रवक्ता ने कहा कि दलित एवं बाह्मण की लड़ाई में पिछड़े पंवार समाज को बलि का बकरा नहीं बनाया जाना चाहिए था।

बैतूल जिले में राष्ट्रपति पुरूस्कार के लिए लेन – देन चयन समिति से लेकर ऊपर तक बाटा जाता है पैसा !

बैतूल जिले में राष्ट्रपति पुरूस्कार / सम्मान के लिए चयनीत व्यक्ति को चयन समिति के सदस्यों से लेकर ऊपर तक रूपैया – पैसा बाटना पड़ता है। आज तक किसी गरीब गुरू दोणाचार्य को प्रदेश की कांग्रेस या भाजपा की सरकार ने राष्ट्रपति पुरूस्कार उसकी अपनी योग्यता एवं कार्यो का स्व विवेक आंकलन करके उसे राष्ट्रपति या राज्यपाल पुरूस्कार दिलवाया है। बैतूल जिले में सुश्री विद्या कैथवास ने अपने राष्ट्रपति पुरूस्कार के लिए उपयोग में लाए गए अस्त्रो एवं शस्त्रो को भले ही सार्वजनिक न किया हो लेकिन सवाल उठा कर सबको घनचक्कर में डाल दिया है। लोग अब सवाल उठाने लगे है कि बैतूल जिले में स्वर्गीय मोतीलाल पाण्डे आमला को मिला राष्ट्रपति पुरूस्कार के पीछे उनकी स्वरचित एवं स्वनिर्मित पंचवटी को देखने के बाद कोई नेत्रहीन व्यक्ति भी उन कलाकृति को छूने के बाद उसके निर्माता को मिले राष्ट्रपति पुरूस्कार पर गौराविंत महसुस करेगा क्योकि आमला की पंचवटी अपने आप में अद्धितीय है। सुश्री गोदावरी बापट जैसे अनेक नामो को बैतूल जिले से राष्ट्रपति पुरूस्कार मिला लेकिन किसी ने भी उनकी योग्यता पर सवाल नहीं उठाये लेकिन श्रीमति वंदना दुबे के बाद से बैतूल जिले में राष्ट्रपति पुरूस्कार सेवा के बदले मेवा का एक प्रमाण है।


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