पुलिस ने डाॅ अरुण अग्रवाल को लिंग परीक्षण करते रंगे हाथों पकड़ा

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रीवा। पिछले दिनों ग्वालियर में महिला एसडीएम ने एक महिला डाॅक्टर को लिंक परीक्षण की डील करने के बाद हिरासत में ले लिया था। तब तमाम विवाद हुआ था और डाॅक्टर हड़ताल पर चले गए थे। अब रीवा पुलिस की महिला अधिकारी ने डाॅ अरुण अग्रवाल  को लिंग परीक्षण करते हुए, रंगे हाथों पकड़ने का दावा किया है। 

इधर डाॅक्टर अग्रवाल का कहना है कि यह एक साजिश है। जिस मशीन को जब्त किया वो तो खराब है। उनके खिलाफ ही साजिश क्यों रची गई, यह डाॅक्टर अग्रवाल ने नहीं बताया।

पुलिस ने शुक्रवार को स्टिंग आपरेशन करते हुए एक चिकित्सक के घर दबिश देकर उन्हें भ्रूण परीक्षण करते हुए रंगेहाथों पकड़ा है। स्टिंग की कमान महिला थाना प्रभारी को सौंपी गई थी। परीक्षण के लिए पहले फोन पर बात हुई और फीस तय की गई। निर्धारित समय पर महिला थाना प्रभारी आराधना सिंह पीटीएस में पदस्थ एक गर्भवती सब इंस्पेक्टर को जांच के लिए लेकर पहुंचीं।

पूरी बात एक दलाल के माध्यम से तय की गई थी। अग्रवाल नर्सिंग होम के संचालक डाॅ अरुण अग्रवाल पर आरोप है कि वे अपने घर में सोनोग्राफी मशीन से भ्रूण परीक्षण करते हुए रंगे हाथ पकड़े गए। पुलिस ने दलाल को भी पकड़ लिया है। कार्रवाई के दौरान एसडीएम विकास सिंह, डिप्टी कलेक्टर शिवांगी अग्रवाल, सीएमएचओ डाॅण् आरएस पांडेय, सीएसपी शिवेन्द्र सिंह बघेल भी मौजूद रहे।

एसडीएम विकास सिंह ने बताया कि इस मामले में वैधानिक कार्यवाही की जा रही है। टीम अपनी रिपोर्ट कलेक्टर को सौंपेगी। जिसके बाद पीसी.पीएनडीटी एक्ट के तहत कोर्ट में प्रकरण पेश किया जाएगा। इसमें 3.5 साल की सजा का प्रावधान है। डाॅ अरुण अग्रवाल का कहना है कि कि जो मशीन जब्त की गई वो चालू नहीं है। ये कार्रवाई एक साजिश है।


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