सोम डिस्टलरीज के मालिक जगदीश अरोरा को तीन आपराधिक प्रकरणों में अलग-अलग सजा

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आबकारी अफसरों को अधिकार नही होने के कारण ब्लैक लिस्टेड सोम के मालिक बच गए कूटरचना करने की सजा से सोम को समाप्त करने की अनुशंसा, शिकायत पर जस्टिस को हटाया

भोपाल  । सोम डिस्टलरीज लिमिटेड के तत्कालीन चेयरमेन और मेनेजिंग डायरेक्टर जगदीश अरोरा को, कोर्ट द्वारा तीन आपराधिक प्रकरणों में अलग-अलग सजा देने से आबकारी विभाग में हड़कंप मच गया है, क्योंकि सोम से सम्बंधित कई आपराधिक प्रकरण सहित, लोन जमा नही करवाने का प्रकरण भी लंबित है । कुछ अफसरों पर सरकार से गद्दारी कर सोम के काले कारनामों को संरक्षण देने के आरोप भी लग रहे है…यही कारण है कि, जिस सोम को समाप्त करने की अनुशंसा हुई हो, वो अब तक चल रही है …..

रायसेन के सेहतगंज स्थित सोम डिस्टलरीज लिमिटेड के संचालको के विरुद्ध मध्यप्रदेश सहित अन्य राज्य में अवैधानिक रूप से शराब तस्करी (परिवहन) करने सहित अन्य अवैधानिक गतिविधि करने पर आपराधिक प्रकरण दर्ज हुए है । कई मामले अलग-अलग कोर्ट में विचाराधीन है ।

मामला अवैधानिक रूप से शराब तस्करी का, एडीईओ भदौरिया के बयान बने सजा का आधार

सोम की फर्म लगातार ब्लैक लिस्टेड भी की गई, पर बड़े अफसरों और नेताओं ने पता नही किस मोटे स्वार्थ के चलते इनको जेल भेजने और लायसेंस निरस्त करने में ढिलाई बरती, क्योंकि आम व्यक्ति के खिलाफ एक अपराध दर्ज होने पर भी उसे तमाम कार्यवाहियाँ झेलना पड़ जाती है …

आबकारी अफसरों को अधिकार नही होने के कारण ब्लैक लिस्टेड सोम के मालिक बच गए कूटरचना करने की सजा से –

खैर अब सोम डिस्टलरी लिमिटेड और इसके मालिक/एमडी जगदीश अरोरा को सजा मिलने का सिलसिला शुरू हो गया है । तीन आपराधिक प्रकरणों में मुरैना जिला न्यायालय के प्रथम श्रेणी न्यायाधीश एन.आर.परमार ने दिनांक 27/09/2019 को तीन अलग-अलग आदेश जारी कर तीनों आपराधिक प्रकरणों में सजा दी है । हालाँकि अरोरा पर दस्तावेज़ों में कूटरचना करना भी प्रमाणित हुआ है किन्तु आबकारी अधिकारियों को इस अपराध में धारा लगाने का अधिकार नही होने के कारण धाराएँ नही लगाई गई । इस कारण से दस्तावेज़ों में कूटरचना करने की धाराओं में सज़ा पाने से अरोरा बच गए।

एडीईओ भदौरिया के बयान बने सजा का आधार –

तत्कालीन आबकारी निरीक्षक मुरैना और वर्तमान एडीईओ इंदौर आबकारी उड़नदस्ता धर्मेन्द्र सिंह भदौरिया सहित चार आबकारी कर्मचारियों के बयानों की, कोर्ट से जगदीश अरोरा को सजा दिलवाने में महत्वपूर्ण भूमिका रही ।

सोम को समाप्त करने की अनुशंसा, शिकायत पर जस्टिस को हटाया-

एमपीएसआईडीसी से सोम डिस्टलरीज लिमिटेड को स्थापित करने के लिए, लिया लोन जमा नही करने के मामले में सोम को समाप्त करने तक की अनुशंसा की जा चुकी थी। लोन की राशि भी 300 करोड़ के करीब पहुँच गई है, ये मामला नई दिल्ली हाईकोर्ट की कम्पनी कोर्ट में वर्षों से लंबित है । इस मामले में दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस के खिलाफ इंदौर के पत्रकार-आरटीआई कार्यकर्ता आर.के.गुप्ता ने शिकायत की थी । गुप्ता की शिकायत पर जस्टिस खन्ना को सुनवाई से हटा दिया गया था। अब जल्दी ही इस मामले में भी कोर्ट आदेश जारी कर सकती है । लोन की राशि जमा करने को लेकर एमपीएसआईडीसी और सोम के बीच समझोता नही होने की स्थिति में कोर्ट संभवतया अगली पेशी पर आदेश जारी कर देगी।

कोर्ट ने ये दी सजा –

कोर्ट ने आपराधिक प्रकरण क्रमांक 1066/06, 1070/06 और 1079/06 तीन प्रकरणों में आबकारी एक्ट की धारा 34(ए)/42 में न्यायालय उठने तक की सजा और 2000 रुपयें का अर्थ दंड। धारा 36/42 में न्यायालय उठने तक की सजा और 500 रुपयें का अर्थ दंड। धारा 37/42 में न्यायालय उठने तक की सजा और 500 रुपयें का अर्थ दंड। धारा 39 (बी) (सी)/42 में  2000 रुपयें का अर्थ दंड। चुकी आबकारी विभाग को दस्तावेज़ों में कूटरचना करने की आपराधिक धारा लगा कर चालान पेश करने के अधिकार नही है इसलिए ये धाराएँ नही लगाई गई थी । जबकि दस्तावेज़ों में कूटरचना करना भी प्रमाणित हुआ है ।

आरोपी फ़रार है, प्रकरण लंबित –

अन्य आरोपी गुरुचरण सिंह, पुरनसिंह और विक्रम के फ़रार हो जाने के कारण कोर्ट ने अरोरा को सज़ा देने के बाद भी फ़िलहाल तीनों प्रकरण समाप्त नही किए है, ना ही एक्सपोर्ट की जाने वाली जप्त अंग्रेज़ी शराब सन्नी मॉल्ट व्हिस्की और ट्रक सहित सामग्री का निराकरण किया है ।


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