सिर्फ केले और चाय पर 22 वर्ष का उपवास अयोध्या मंदिर निर्माण पर तोड़ेंगी व्रत

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ANI NEWS INDIA @ http://aninewsindia.com

जिला ब्यूरो चीफ जबलपुर // प्रशांत वैश्य : 79990 57770

जबलपुर. अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण हो इसके लिए सदियों से संघर्ष चला रहा था, सड़क से लेकर अदालत तक लड़ाईयां लड़ी गईं और आखिरकार देश के उच्चतम न्यायालय ने राम मंदिर के निर्माण का रास्ता साफ कर दिया। इस संघर्ष में हजारों लाखों लोगों ने सहभागिता दी जिनमें कुछ लोग ऐसे भी थे जिन्होंने मन ही मन राम मंदिर निर्माण का संकल्प ले लिया और तपस्या की, उनमें से एक हैं जबलपुर की उर्मिला चतुर्वेदी… जो पिछले 27 सालों से लगातार व्रत कर रही हैं…..देखिए जबलपुर से हमारी ये स्पेशल रिपोर्ट….

01-87 साल की उर्मिला चतुर्वेदी… आज भले ही उम्र के इस पड़ाव में आकर कमजोर नजर आ रही हैं लेकिन इनका संकल्प बेहद मजबूत है। पिछले 27 सालों से केवल इसलिए उपवास किया क्योंकि वे अयोध्या में भगवान राम का मंदिर बनते हुए देखना चाहती थीं। सन् 1992 में जब कारसेवकों ने राम जन्मभूमि पर बने बाबरी मस्जिद के ढ़ांचे को गिराया और वहां खूनी संघर्ष हुआ तब उन्होंने संकल्प लिया था कि जब तक अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का काम शुरू ना हो जाए तब तक वह अनाज ग्रहण नहीं करेगी। राजनीतिक इच्छाशक्ति से इतर उर्मिला चतुर्वेदी का संकल्प इतना मजबूत था कि उन्होंने 1992 के बाद खाना नहीं खाया।

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वह पिछले 27 सालों से इंतजार कर रही थी कि अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण हो। जबलपुर के विजय नगर इलाके की रहने वाली उर्मिला चतुर्वेदी की उम्र तकरीबन 87 साल है विवादित ढ़ांचा टूटने के दौरान देश में दंगे हुए खून खराबा हुआ हिंदू-मुस्लिम भाईयों ने एक दूसरे का खून बहाया तो ये सब नजारा देखकर उर्मिला चतुर्वेदी बेहद दुखी हुईं और उस दिन उन्होंने संकल्प ले लिया कि अब वह अनाज तभी खाएंगी, जब देश में भाईचारे के साथ अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण कराया जाएगा।

वीडियो : इनका कहना है – उर्मिला चतुर्वेदी (रामभक्त)

इस बीच यह पूरा मसला अदालत में चलता रहा लंबी न्याय की लड़ाई हुई और जब 9 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट का फैसला आया तो उर्मिला चतुर्वेदी की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उन्होंने भगवान राम को साष्टांग प्रणाम किया। उर्मिला का कहना है कि 27 साल के लंबे संघर्ष के बाद उन्हें सफलता मिल गई है। इन 27 सालों में उन्हें कई परेशानियों का सामना भी करना पड़ा अनाज का त्याग करने से वह अपने रिश्तेदार और समाज से भी दूर हो गईं। लोगों ने कई बार उन पर उपवास खत्म करने का भी दबाव बनाया। लेकिन बहुत सारे लोग ऐसे भी थे कि जिन्होंने उनके आत्मविश्वास और साधना की तारीफ भी की और उन्हें कई बार सार्वजनिक मंच से सम्मानित किया गया।

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वीओ 02- उर्मिला का कहना है कि वह सुप्रीम कोर्ट के पांचों न्यायाधीश का दिल से धन्यवाद करती हैं और उनकी इच्छा है कि वह अयोध्या में जाकर ही रामलला के दर्शन के बाद अपना उपवास खत्म करें। हालांकि जैसे ही सुप्रीम कोर्ट का फैसला आया उर्मिला के परिजनों ने उन्हें खाना खिलाने की पुरजोर कोशिश की लेकिन उर्मिला का संकल्प है कि वह उपवास अयोध्या में ही खोलेंगी। उर्मिला चतुर्वेदी के परिजन भी उनके इस साधना में बराबर के साथ रहे परिजनों का कहना है कि वे इतनी बुजुर्ग होने के बावजूद भी उनके अंदर ऊर्जा की कमी नहीं है हालाँकि उम्र के इस पड़ाव में आकर वह कुछ कमजोर जरूर हो गई है लेकिन राम मंदिर निर्माण की ख
बर सुनते ही उनका आत्मविश्वास और उत्साह सातवें आसमान पर पहुंच गया था।


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