महिला एवं बाल विकास विभाग केवलारी की पर्यवेक्षकों की चल रही है मनमर्जी

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ANI NEWS INDIA @ http://aninewsindia.com

सिवनी से देवराज डेहरिया की रिपोर्ट

सिवनी । सिवनी जिले के केवलारी विकासखंड के अंतर्गत महिला एवं बाल विकास परियोजना केवलारी में इन दिनों स्थायी परियोजना अधिकारी के न होने के चलते पर्यवेक्षकों द्वारा अपने पदीय कर्तव्यों के विरुद्ध खुलेआम मनमानी इत्यादि की जा रही है जिसमें शासन प्रशासन की उदासीनता साफ झलक रही है ।

ज्ञात होवे कि महिला एवं बाल विकास परियोजना केवलारी में विगत 10 माह से परियोजना अधिकारी का पद खाली है, यहां परियोजना धनौरा की परियोजना अधिकारी श्रीमती विमला वनवासी को अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है, अतिरिक्त प्रभार के कारण प्रभारी परियोजना अधिकारी विमला वनवासी माह में दो-चार बार ही परियोजना केवलारी में बैठती होंगी। चूंकि परियोजना अधिकारी विमला वनवासी अत्यंत सहज सरल स्वभाव की महिला है, जिसके कारण परियोजना केवलारी की सुपरवाइजर भयमुक्त होकर निरंतर अपनी मनमर्जी करते आ रहीं हैं।

ज्ञात हो कि वर्ष 2017 में माह सितंबर से फरवरी 2018 तक जब परियोजना केवलारी में भी परियोजना अधिकारी का पद रिक्त था तब यहां का अतिरिक्त प्रभार सिवनी परियोजना की अधिकारी श्रीमती मेंहरीन मरावी को सौंपा गया था इनके कार्यकाल में पर्यवेक्षकों की मनमर्जी नहीं चल पा रही थी तब ये पर्यवेक्षक तत्कालीन प्रभारी परियोजना अधिकारी मेंहरीन मरावी के नाम से रोना रो रहीं थी कि, इनको प्रभार क्यों दे दिया गया है बहुत ज्यादा नियम कानून बताती हैं इस तरह से इन पर्यवेक्षकों को नियम कानून वाले सक्त अधिकारी पसंद नहीं आते हैं ये पर्यवेक्षक सीधा-साधा परियोजना अधिकारी पसंद करते हैं।

अभी वर्तमान में प्रभारी परियोजना अधिकारी विमला वनवासी के कार्यकाल में इनका स्वर्णकाल है क्योंकि ये पर्यवेक्षक अपनी स्वेच्छा से बिना नियम कानून के अपने कर्तव्यों का पालन करते आ रही है परियोजना केवलारी में तो इतना भी गजब हो रहा है कि जिस परिक्षेत्र की जो पर्यवेक्षक है उसके अतिरिक्त तीन-तीन अन्य परिक्षेत्र पर्यवेक्षकों का अनाधिकृत तौर से आंगनवाड़ी केंद्रों का भ्रमण कर निरीक्षण किया जा रहा है सामूहिक रुप से चार-चार पर्यवेक्षक लामबंद होकर आंगनवाड़ी केंद्रों का निरीक्षण कर आंगनवाडी कार्यकर्ता को डरा धमका रही हैं।

उल्लेखनीय है कि शासन के स्पष्ट निर्देश होने के बावजूद भी ये पर्यवेक्षक अपने परिक्षेत्र मुख्यालय में निवासरत न होकर 50 से 60 किलोमीटर दूर अन्य जिले से आवागमन कर शासन की नौकरी कर रहे हैं। अपनी पदस्थापना से लेकर वर्तमान तक ये परिक्षेत्र पर्यवेक्षक मुख्यालय में निवासरत नहीं है जबकि जिले के कलेक्टर का भी स्पष्ट आदेश है कि कर्मचारी अपने मुख्यालय में रहें बिना अनुमति मुख्यालय न छोड़ें इसके बावजूद भी इन आदेश-निर्देशों का इन पर्यवेक्षकों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है, यहां तक कि अभी कुछ दिन पहले जिले में धारा 144 के दौरान भी ये पर्यवेक्षक अपने मुख्यालय में निवासरत नहीं थीं कुछ एक दो पर्यवेक्षकों द्वारा दिखावे के लिये केवलारी में सामूहिक रुप से एक कमरा किराए से ले रखा है जिससे वो मुख्यालय में निवासरत होना सिद्ध हो सके, यदि इनके मुख्यालय में निवासरत का सत्यापन अन्य दूसरे विभाग के अधिकारी और जागृति निधि के संयुक्त दल द्वारा कराया जाए तो सारी सच्चाई सामने आ जाएगी।

ज्ञात होवे कि अभी हाल ही में दिनांक 23 नंबर 2019 को प्रातः लगभग 11 बजे चार पर्यवेक्षक क्रमशः किरण सोलंकी, पूनम तिवारी रचना कुल्हाड़े एवं शोभा धुर्वे द्वारा एक आंगनवाडी केंद्र गिट्टी खदान शांति नगर मैरा में निरीक्षण हेतु उपस्थिति हुयीं और उपस्थित होते ही यहां की आंगनवाडी कार्यकर्ता अर्चना भलावी को घेरते हुये बेवजह डराने के हिसाब से आंगनवाडी केंद्र के अभिलेखों की अपने मोबाइल से फोटो निकालने लगी फिर अन्य परिक्षेत्र की पर्यवेक्षक पूनम तिवारी द्वारा अर्चना भलावी से कहा गया कि हम सभी आपके आगनबाडी केंद्र क्यों आए हैं तुम समझ गई होंगी, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता द्वारा कहा गया कि नहीं मैडम मुझे कैसे पता हो सकता है कि आप सभी मेरे आगनबाडी केंद्र में क्यों आए हैं तब सभी उपस्थित पर्यवेक्षकों ने कहा कि तुम्हारे ग्राम का एक नागरिक देवराज डेहरिया द्वारा दिनांक 22 नवम्बर 2019 को परियोजना कार्यालय केवलारी में सूचना के अधिकार के तहत जानकारी हेतु आवेदन लगाया है जिसमें उसने हम सभी पर्यवेक्षकों के मुख्यालय में निवासरत संबंधी एवं हमारे परिक्षेत्र संबंधी अन्य जानकारी मांगी है तुम उस आवेदन को देवराज से बोलकर कार्यालय से वापिस ले लो नहीं तो हम तुम्हारी नौकरी खा जाएंगे, तुम्हारे आंगनवाडी केंद्र का निरीक्षण जिला कार्यक्रम अधिकारी मैडम से कराकर तुम्हारी सेवा समाप्त करवा देंगे।

इस तरह से सभी उपस्थित चारों पर्यवेक्षक आंगनवाडी कार्यकर्ता को दबाव बना रही थी। तभी उक्त घटनाक्रम को प्राथमिक पाठशाला की शिक्षिका श्रीमती मेश्राम मैडम देख रही थी जब बात ज्यादा बढ़ते देखा तब शिक्षिका श्रीमती मेश्राम द्वारा ग्राम के किसी नागरिक को फोन लगाया कि यहां आंगनवाडी केंद्र में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता को चार-चार सुपरवाइजर अनावश्यक रुप से डरा धमका रही हैं तब ग्राम की चार-पांच महिलाएं एवं दो-चार पुरुष आंगनवाडी पहुंच गए और उक्त ग्रामीणों द्वारा घटनाक्रम का वीडियो भी बनाया।

इसके बाद यह सब देख कर चारों पर्यवेक्षक अपने चेहरे पर कपड़ा बांध कर चली गयीं। तत्पश्चात ग्रामवासियों द्वारा उक्त घटनाक्रम का पंचनामा बनाकर सीएम हेल्पलाइन में शिकायत की गई। उक्त घटना दिनांक के एक दिन पहले दिनांक 22 नवम्बर को भी अन्य परिक्षेत्र की पर्यवेक्षक रचना कुल्हाड़े एवं पूनम तिवारी द्वारा ग्राम मैरा के आंगनवाडी केंद्र की आंगनवाड़ी कार्यकर्ता विमला पार के घर पहुंचकर गिट्टी-खदान की आंगनवाड़ी कार्यकर्ता अर्चना भलावी को विमला पार से फोन लगवाकर घर पर बुलवाती हैं विमला पार के कहने पर जब अर्चना भलावी विमला पार के घर जाती है तब वहां पर्यवेक्षक पूनम तिवारी एवं रचना कुल्हाड़े को देखकर वापस हो जाती है फिर विमला पार द्वारा पुनः फोन कराया जाता है। इस तरह से ये पर्यवेक्षक अपने परिक्षेत्र का भ्रमण न करते हुए अन्न परिक्षेत्र की आंगनवाड़ी कार्यकर्ता को डरा धमका रहीं है

जबकि कोई परिक्षेत्र पर्यवेक्षक अपने क्षेत्र को छोड़कर अनाधिकृत तौर से वो भी चार-चार पर्यवेक्षक कैसे किसी आंगनवाडी केंद्र का निरीक्षण कर सकती है जैसे एक परियोजना अधिकारी दूसरी अन्य परियोजना में घुसकर निरीक्षण नहीं कर सकता है, लेकिन यहां तो हमेशा पूनम तिवारी एवं रचना कुल्हाड़े एक दूसरे के परिक्षेत्र का हमेशा साथ में निरीक्षण करती है इसके ठोस प्रमाण भी उपलब्ध हुए हैं। इस घटनाक्रम की सूचना एवं शिकायत उपस्थित ग्रामीणों द्वारा जिला कार्यक्रम अधिकारी मेडम की गई तब जिला कार्यक्रम अधिकारी द्वारा उक्त पर्यवेक्षकों के विरूद्ध कार्यवाही करने की बात कही गयी।

अब देखना यह है कि जिला कार्यक्रम अधिकारी द्वारा उक्त पर्यवेक्षकों के विरूद्ध कार्यवाही की जाती है या फिर उन्हे संरक्षण देकर अपनी मनमर्जी करने हेतु खुलेआम छोड़ दिया जाता है?

गौरतलब है कि परियोजना केवलारी में पर्यवेक्षकों की मनमर्जी को रोकने हेतु प्रभारी परियोजना अधिकारी विमला वनवासी के स्थान पर सिवनी परियोजना की परियोजना अधिकारी मेहरीन मरावी को प्रभार दिया जाना उचित होगा तभी इन पर्यवेक्षकों पर अंकुश लगना संभव है।


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