सी.एम. हेल्पलाईन जनता के लिए अभिशाप, शिकायत करना सिर्फ समय की बर्बादी

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ANI NEWS INDIA @ http://aninewsindia.com

ब्यूरो चीफ नागदा, जिला उज्जैन // विष्णु शर्मा 8305895567

नागदा- सी.एम. हेल्पलाईन पर 5 बार जन्मेजय अपार्टमेन्ट की शिकायत की गई मगर नगर पालिका नागदा ने यह कहकर कटवा दी कि सिविल कोर्ट में केस चल रहा है। मगर आवेदक कमलेश दवे सहज ने 181 व जनसुनवाई में स्पष्ट रूप से बताया है कि वह केस में पक्षकार नहीं है।

पूर्व सी.एम.ओ. भविष्यकुमारजी खोब्रागडे ने जन्मेजय अपार्टमेन्ट की 24/8/2018 को भवन अनुमति को निलंबित कर दिया था। तो फिर वर्तमान सी.एम.ओ. सतीश मटसेनिया जी ने 23/3/2019 को भवन अनुमति बहाल क्यों की ? जबकि हाईकोर्ट में केस चल रहा था व उसका फैसला 15/5/2019 को आया और हाईकोर्ट में काॅलोनीवासीयों को यह स्वतंत्रता दी कि आप सिविल सुट लगाईये।

(1) जन्मेजय अपार्टमेन्ट की वर्तमान संचालिका श्रीमती सरोज जैन का कहना है कि 22/4/1996  को व 5/11/1999 को भवन अनुमति प्राप्त हुई थी। जबकि पूर्व डायरेक्टर विजय जैन ने 12/5/1998 को प्रकोष्ठ बनवाया था व उसमें लिखा है कि उन्हें भवन अनुमति प्राप्त नहीं हुई। इसलिये मौन स्वीकृति पर भवन का निर्माण किया गया व विजय जैन ने जी$2 व 3 का निर्माण करने के लिये 4/2/2003 को नगर पालिका नागदा में जो आवेदन दिया था उसमें स्पष्ट लिखा है कि उन्हें 15/11/1996 को भवन अनुमति प्राप्त हुई थी।

जबकि आरटीआई के तहत 6/1/2020 को जो जानकारी नगर पालिका के कर्मचारी कुशलपालजी यादव ने कमलेश दवे को 10 माह बाद प्रदान की उस जानकारी के तहत भवन अनुमति पंजी रजिस्टर की प्रमाणित प्रतिलिपि दी गई है और उक्त रजिस्टर में 22/4/1996, 15/11/1996 व 5/11/1999 को भवन अनुमति देने का कोई उल्लेख नहीं है। उक्त रजिस्टर में सिर्फ 19/11/2003 को प्रकरण क्रमांक 15ग152 ध् 95 पर जी$2 व 3 की अनुमति देना दर्शाया गया है।

(जब जी व जी$1 की अनुमति नहीं है और 4/2/2003 के आवेदन में इसका जिक्र भी नहीं है और जी$3 का भी उस आवेदन में जिक्र नहीं किया गया है तो फिर जी$2 व जी$3 की अनुमति किस आधार पर दी गई है। अगर ऐसा कोई नियम है तो नगर पालिका नागदा स्पष्ट करें। ताकि लोग पहले एक मंजिला भवन बिना अनुमति के बना ले उसके 25 साल बाद दुसरे व तीसरे तल की अनुमति मांगे और उन्हें वह आसानी से दे दी जायेगी बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के।)

जय काॅलोनाईजर ने 19/11/2003 को भवन अनुमति मिलने के बाद जी$2 व 3 का निर्माण नहीं करवाया व 17/08/2016 को पुनः आवेदन दिया और 28/07/2017 को जी$2 व 3 की अनुमति उन्हें नगर पालिका नागदा से मिल गई और भवन अनुमति का क्रमांक भी बदल गया। पहले 15ग152 ध् 1995 था अब 15ग352 ध् 2016 हो गया है। इस भ्रष्टाचार से पुरे प्रदेश व देश का ध्यान अवगत कराना चाहता हूं ताकि भविष्य में कोई कर्मचारी ऐसी हिम्मत ना करें।

(2) नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग उज्जैन के अधिक्षण यंत्री ने 17/06/2019 को एक आदेश पत्र निकाला उसमें लिखा है कि काॅलोनाईजर जीएसआईटीएस इन्दौर के विशेषज्ञ से अपार्टमेन्ट का स्टेबिलिटी टेस्ट करवाए। मगर काॅलोनाईजर ने नगर पालिका नागदा से कहा जीएसआईटीएस इन्दौर के पास समय नहीं है। इसलिये अन्य इंजीनियरिंग काॅलेज से टेस्ट करवाने की अनुमति प्रदान की कीजिए और अधीक्षण यंत्री ने अनुमति प्रदान कर दी। लेकिन अपीलार्थी द्वारा नगर पालिका को प्रमाणित प्रतिलिपि के साथ सच्चाई से अवगत कराया गया और यह बताया गया कि काॅलोनाईजर जीएसआईटीएस में गये ही नहीं। तो नगर पालिका नागदा ने 29/11/2019 को पुनः काॅलोनाईजर को पत्र लिखा और उसमें इस बात का उल्लेख किया कि आपने गलत जानकारी दी थी इसलिये जी एस आई टी एस इन्दौर से ही स्टेबिलिटी टेस्ट करवाए । जो शायद आज दिनांक तक नहीं करवाया गया। काॅलोनाईजर ने जी$2 का निर्माण कर लिया है अपार्टमेन्ट कमजोर हो चुका है और अगर किसी दिन गिर गया और जान माल की हानि हुई तो इसका जवाबदार कौन ?

(3) टीएनसीपी विभाग उज्जैन ने 18/10/1995 को 13600 वर्गफीट जमीन पर अपार्टमेन्ट बनाने की अनुमति जय काॅलोनाईजर को दिनांक 9/10/1995 के एक मुख्त्यारनामे पर प्रदान कर दी थी। लेकिन काॅलोनाईजर ने टीएनसीपी से परमिशन मिलने के बाद 9/10/1995, 12/10/1995 व 17/06/1996 को जो रजिस्ट्री करवाई उसमें कुल 12000 वर्गफीट का ही जिक्र है व 12/5/1998 के प्रकोष्ठ की रजिस्ट्री में भी सिर्फ इन्हीं तीन रजिस्ट्रियों का जिक्र है। 1600 वर्गफीट जमीन काॅलोनाईजर द्वारा कम खरीदी गई और जो 12000 वर्गफीट की रजिस्ट्री है उसमें से भी करीबन 1560 वर्गफीट पर हेल्थकेयर के नाम से पानी का प्लांट डालकर अतिक्रमण किया गया है।
नागदा तहसीलदार द्वारा भी दिनांक 19/9/2019 को जो पंचनामा बनाया गया था व उसमें भी लिखा है कि काॅलोनाईजर के पास कुल 12000 वर्गफीट की ही रजिस्ट्री है।

माननीय मुख्यमंत्रीजी श्रीमान् कमलनाथ जी से निवेदन है कि अतिक्रमण व कब्जे की भूमि को खाली करवाने के लिये आपके द्वारा चलाई गई मुहिम का असर नागदा में भी दिखाई दे कृपया ऐसी व्यवस्था करने की कृपा करें व गलत तरीके से किया गया जन्मेजय अपार्टमेन्ट का जी$2 का निर्माण तुड़वाया जाए व पानी के प्लांट का अतिक्रमण हटाया जाए और फर्जी भवन अनुमति के लिये काॅलोनाईजर पर वैधानिक कार्यवाही की जाए। ताकि 181 की विश्वसनीयता बरकरार रहे।
एक अन्य शिकायत भी डेढ़ वर्ष में सी एम हेल्पलाईन पर पांच बार कर चूका हूं व पिछले सात माह से जनसुनवाई में भी दस बार जा चुका हुँ मगर कोई हल नहीं हुआ है।

नगर पालिका नागदा के सामने विजयराजे सिंधिया काम्पलेक्स के तलघर में 16/11/2010 को एक दुकान सवा तीन लाख रूपये में मैने खरीदी थी मगर बाद में पता चला कि उसमें करीबन तीन फीट तक पानी भरा रहता है। नगर पालिका नागदा में दस बार लिखित शिकायत कर चुका हूं व नगरीय प्रशासन विभाग उज्जैन में भी तीन बार लिखित शिकायत कर चूका हूं। मगर परिणाम शुन्य है।

अतः निवेदन है कि समस्या को खत्म किया जाए या पास के काम्प्लेक्स में दुकान दी जाए या पैसा वापस किया जाए। उक्त काम्पलेक्स में कुल सात दुकाने है तीन की निलामी हुई थी बाकी सब ऐसी ही पड़ी है। अगर समस्या का हल किया जाता तो वे दुकाने भी बिक सकती थी और नगर पालिका  नागदा को दस बारह लाख की कमाई होती, किराया भी प्राप्त होता, इसलिये मेरा निवेदन है कि लापरवाह कर्मचारियों पर आवश्यक वैधानिक कार्यवाही की जाए व नगर पालिका नागदा को हुई आर्थिक क्षति की क्षतिपूर्ति की जाए।


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