देशभर में हुई ओद्यौगिक दुर्घटनाओं के पश्चात खतरनाक रासायनिक बारुद के ढेर पर बसे नागदा तहसील की आम जनता की सुरक्षा की मांग

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 ANI  NEWS INDIA  @ http://aninewsindia.com

ब्यूरो चीफ नागदा, जिला उज्जैन // विष्णु शर्मा 8305895567

नागदा- हाल ही में देश के विभिन्न ओद्यौगिक क्षेत्रों में स्थित केमिकल एवं गैस आधारित उद्योगों में हुए घटनाक्रमों के पश्चात ओद्यौगिक शहर नागदा में स्थित अति खतरनाक श्रेणी में आने वाले 3 उद्योगों मेसर्स ग्रेसिम इंडस्ट्रीज लिमिटेड (स्टेपल फाइबर डिवीजन), लेक्सेस इंडिया प्राइवेट लिमिटेड एवं ग्रेसिम केमिकल डिवीजन में सुरक्षा और जोख़िम से बचाव के लिए नए दिशानिर्देश एवं प्लान तैयार करवाए जाने की मांग असंगठित मजदूर कांग्रेस के प्रदेश संयोजक अभिषेक चौरसिया ने शासन के विभिन्न स्तर पर उठाई हैं।

जिसके अंतर्गत जिला कलेक्टर आशीष सिंह, संभागीय कमिश्नर आनंद कुमार शर्मा, प्रमुख सचिव श्री इकबाल सिंह बैंस, श्री पी. राघवेंद्र,सचिव, रसायन एवं पेट्रोेमिकल्स मंत्रालय, भारत सरकार, अध्यक्ष, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, नई दिल्ली, डायरेक्टर, ओद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग, इंदौर, अध्यक्ष, मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड एवं श्रम आयुक्त आशुतोष अवस्थी, इंदौर को भेजा हैं ।

अपने आवेदन के माध्यम से निम्नलिखित मांग की है –

1) नागदा के समस्त ओद्यौगिक इकाइयों में रसायन (केमिकल) का सुरक्षित भंडारण (स्टोरेज) सुनिश्चित करवाया जाए एवं इनकी श्रमिकों के कार्यस्थल से एक निश्चित दूरी तय करवाई जाए ।
2) नागदा के समस्त ओद्यौगिक इकाइयों में उपयोग किए जाने वाले केमिकल की मैटेरियल सेफ्टी डेटा शीट मौजूद हो ।
3) नागदा के ओद्यौगिक इकाइयों में लाए जा रहे केमिकल के स्टोर से जुड़ी जानकारी और रिसाव के वक्त क्या करना है और क्या नहीं?? इसकी लिस्ट तैयार करवाई जाए ।
4) नागदा के समस्त ओद्यौगिक इकाइयों में केमिकल के ट्रांसपोर्टेशन के समय बिना जीपीएस नेविगेशन सिस्टम वाले वाहनों की आवाजाही पर रोक लगाई जाए और सुरक्षा मानकों का ध्यान रखा जाए ।
5) नागदा की समस्त ओद्यौगिक इकाइयों में ऑनसाइट इमरजेंसी प्लान्स की योजना तैयार करवाई जाए और संबंधित प्लान व उसके सुरक्षा अधिकारियों के नंबर सहित सूची सार्वजनिक करवाई जाए ।
6) नागदा की सभी ओद्यौगिक इकाइयों द्वारा प्रोडक्शन प्लांट में खतरनाक रसायनों एवं गैसौं का भंडारण करने से पहले इन उद्योगों में शासन द्वारा उच्चस्तरीय सुरक्षा और जोख़िम का ऑडिट करवाया जाए ।
7) नागदा की सभी ओद्यौगिक इकाइयों को जितनी गैस एवं केमिकल भंडारण की क्षमता की अनुमति है लेकिन उससे कई गुना अधिक मात्रा में भंडारण करके रखते है जिसकी जांच करवाकर शासन द्वारा ऑडिट किया जाए ।
8) नागदा में स्थित अति खतरनाक श्रेणी में आने वाले 3 उद्योगों मेसर्स ग्रेसिम इंडस्ट्रीज लिमिटेड (स्टेपल फाइबर डिवीजन), लेक्सेस इंडिया प्राइवेट लिमिटेड एवं ग्रेसिम केमिकल डिवीजन को विशेष हिदायत बरतने के तत्काल दिशा-निर्देश जारी किए जाए ।क्योंकि इन उद्योगों में प्रोडक्शन में रासायनिक गैसों एवं केमिकलों का इस्तेमाल किया जाता है । इन इकाइयों में इंडस्ट्रियल गैस व केमिकल भी स्टोर किया जाता है ।
9) इन उद्योगों में जिन केमिकल और गैस का उपयोग किया जाता हैं अगर कोई श्रमिक या आम नागरिक उसकी चपेट में आ जाए तो उससे बचाव की एंटी डोज मेडिसिन की उपलब्धता इन उद्योगों के पास अथवा स्थानीय अस्पतालों में सुनिश्चित करवाई जाए ।

अभिषेक चौरसिया ने बताया है कि हाल ही मैं आंध्रप्रदेश में विशाखापट्टनम, तमिलनाडु में कुड्डालोर, महाराष्ट्र में नासिक और छत्तीसगढ़ में रायगढ़ ये उन जगहों के नाम हैं जहाँ 7 मई 2020 को हुए अलग-अलग भीषण औद्योगिक हादसों में अनेकों श्रमिक मारे गए और हवा का रुख जिस तरफ था उस ओर सैकड़ों आम नागरिक प्रभावित हुए हैं । नागदा भी एक ओद्योगिक शहर हैं जहां ओद्यौगिक इकाइया नागदा की नगर सीमा में स्थित है और नगरपालिका के क्षेत्र के अन्तर्गत आती हैं ।

इनके द्वारा घातक केमिकल एवं गैसो का उपयोग एवं उत्पादन किया जाता है । लेकिन शहर की सुरक्षा की कितनी ठोस व्यवस्था हैं इस ओर इन घटनाओं के बाद स्थानीय शासन द्वारा आज दिनांक तक कोई भी कार्यवाही क्यों नहीं की गई हैं। क्यों बारूद के ढेर पर स्थित शहर की सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करवाए जाने की ओर ध्यान नहीं दिया गया । आज इमरजेंसी स्वास्थ्य सुविधा के नाम पर शहर में कोई बड़ी व्यवस्था उपलब्ध नहीं हैं ।

पूर्व में लिए वायु के सैंपल की रिपोर्ट में भी गैस वातावरण में पाई गई थी –

अभिषेक चौरसिया ने बताया कि पूर्व में उनके द्वारा नागदा के ओद्योगिक इकाइयों के समीप से वायु प्रदूषण की जांच हेतु वायु का एक सैंपल एकत्रित किया गया था लेकिन कोविड-19 की वजह से उसकी जांच रिपोर्ट देर से आने की वजह से उसे सार्वजनिक नहीं कर पाए । उक्त रिपोर्ट में 3 गैस कार्बन डाई सल्फाइड-CS2, बेंज़ेन एवं टोलविन पाई गई थी जो कि नागदा के उद्योगों में उपयोग की जाती है । और वातावरण में इस प्रकार की ख़तरनाक गैस का होना एक गंभीर चिंता का विषय है । यह किस प्रकार श्रमिकों और शहर के रहवासियों एवं ग्रामीणों के स्वास्थ्य पर दुष्प्रभाव डाल रही हैं । जिसके भविष्य में गंभीर परिणाम आना तय हैं । यही नहीं जांच रिपोर्ट में जो गैस अाई थी उनके दुष्प्रभाव काफ़ी अधिक हैं जिसकी जानकारी सभी को होना अतिआवश्यक हैं –

अभिषेक चौरसिया ने बताया कि

1) अमेरिकन कैंसर सोसायटी की रिसर्च के अनुसार बेंजीन गैस अस्थि मज्जा पर हानिकारक प्रभाव डालता है और लाल रक्त कोशिकाओं में कमी का कारण बन सकता है, जिससे एनीमिया हो सकता है।  यह अत्यधिक रक्तस्राव का कारण भी हो सकता है और प्रतिरक्षा प्रणाली को प्रभावित कर सकता है, जिससे संक्रमण की संभावना बढ़ जाती है। इसका उपयोग केमिकल डिवीजन एवं लेक्सस इंडिया प्राइवेट लिमिटेड में होता है ।
2) एजेंसी फॉर टॉक्सिक सब्सटेंस एंड डिसीस रजिस्ट्री के रिसर्च के अनुसार कार्बन डाइसल्फ़ाइड CS2 वाष्प या तरल के साथ त्वचा के संपर्क में जलन हो सकती है।  तीव्र न्यूरोलॉजिकल प्रभाव इनहेलेशन, अंतर्ग्रहण या त्वचा के संपर्क से हो सकता है और इसमें सिरदर्द, भ्रम, मनोविकृति और कोमा शामिल हो सकते हैं।  कार्बन डाइसल्फ़ाइड के अत्यधिक उच्च स्तर के तीव्र जोखिम के परिणामस्वरूप मृत्यु हो सकती है। इसका उपयोग ग्रेसिम इंडस्ट्रीज लिमिटेड (स्टेपल फाइबर डिवीजन) में होता है ।
3) यूनाइटेड स्टेट्स डिपार्टमेंट ऑफ लेबर, अमेरिका की रिसर्च के अनुसार टोलविन के संपर्क में जिगर और गुर्दे की क्षति हो सकती है। टोल्यूनि केंद्रीय तंत्रिका तंत्र, आंखें, त्वचा, श्वसन प्रणाली, यकृत, गुर्दे को प्रभावित करता है। इसका उपयोग लेक्सेस इंडिया प्राइवेट लिमिटेड में होता है ।


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