वातावरण में जहर घोलने का काम कर रहा है लेन्सेक्स उद्योग

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ANI NEWS INDIA @ http://aninewsindia.com

जिला ब्यूरो चीफ उज्जैन, नागदा // विष्णु शर्मा : 8305895567

लगातार निकल रहा चिमनी से धुआँ- जांच करने वाले है मौन

एएनआई न्यूज़ इण्डिया संवाददाता, उज्जैन नागदा : जिले में प्रदूषण नियंत्रण विभाग का क्षेत्रीय कार्यालय है जरूर, लेकिन यह केवल छोटी जांचों व अनापत्ति प्रपत्र निर्गत करने तक ही सीमित है। जिले में वायु, जल या फिर अन्य प्रदूषण के स्तर की जांच के लिए कोई इंतजाम व संसाधन ही नहीं हैं ऐसा लगता है।
ऐसे में सांसों में घुल रहा जहर जिदगी लगातार कम कर रहा है।
जिले की नागदा तहसील औद्योगिक क्षेत्र हैं। यहां लगभग चार बड़ी फैक्ट्रियां हैं, जिसमें धुआं उगलने वाली एक फैक्ट्रियां हैं। इन फैक्ट्रियों से निकलने वाला धुआं वायुमंडल में घुल रहा है।

यह भी कम नहीं
लेन्सेक्स उद्योग से निकल रहा जहरीला धुआं आबोहवा को खराब कर रहा है। आसपास रहने वाली आबादी को भी जहरीली सांस लेने को मजबूर होना पड़ रहा है।

जिले में प्रदूषण नियंत्रण विभाग की ओर से प्रदूषण की जांच मात्र कागज में देखने तक ही सीमित रह गई है। यही वजह है जहर उगल रहे उद्योग जीवन के लिए खतरा बन रहे हैं।

सुबह से रात तक ये उद्योग जहरीली गैस के साथ ही चिमनियों से निकलने वाला धुआँ आस पास के क्षेत्रों में रहने वालों को सांस, एलर्जी की बीमारियों की चपेट में ले रही हैं।

फैक्ट्रियां आबोहवा में घोल रहीं जहर

औद्योगिक क्षेत्र नागदा में लेन्सेक्स इण्डिया प्रायवेट लिमिटेड की इकाइयां हैं। लगता है इस फैक्ट्रियों में मानक ऊंचाई की चिमनियां नहीं लगाई गई हैं। इनसे निकलने वाला धुआं हवा में लगातार जहर घोल रहा है।

इन पर रोकथाम के साथ प्रदूषण नियंत्रण विभाग की ओर से कोई कारगर प्रयास भी नहीं किया गया है। लगता है
विभाग के पास प्रदूषण जांच के लिए कोई उपकरण व संसाधन नहीं हैं। ऐसे में नगर में फैल रहे वायु प्रदूषण का आकलन नहीं हो पा रहा। न ही किसी औद्योगिक इकाइयों को नोटिस ही दीया गई है की वातावरण को दूषित क्यो कर रहे है ये उद्योग। शिकायत मिलने पर नमूना संकलित कर प्रयोगशाला भेजा जाता है। लेकिन होता कुछ नही है।
बढ़ते प्रदूषण से सांस के रोगी बढ़ रहे हैं। मौजूदा समय में प्रदूषण सांस की परेशानी की प्रमुख वजह है। लोगों में फेफड़े व लिवर की बीमारी भी बढ़ रही है। औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले प्रदूषित धुएं से चिड़चिड़ापन, एलर्जी होना आम बात है। वायु में प्रदूषण का स्तर अधिक होने से कैंसर का भी खतरा रहता है।

यूं बढ़ रहा हवा में प्रदूषण औद्योगिक इकाइयों की चिमनियों से निकलने वाला धुआं वातावरण में जहर घोलने का काम कर रहा है और प्रदूषण विभाग मौन है।


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