सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला अब पिता की सम्पत्ति में बेटो के बराबर ही बेटियों को हिस्सा मिलेगी। लगता है, आज जन्मष्टामी के शुभ अवसर पे लगता है रामराज्य आ गया मोदियुग में बहनो के लिए खुशखबरी

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ANI NEWS INDIA @ http://aninewsindia.com

मुंबई // गुणवंत सिंह बघेल : 9967086023

 

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला अब पिता की सम्पत्ति में बेटो के बराबर ही बेटियों को हिस्सा मिलेगी। लगता है, आज जन्मष्टामी के शुभ अवसर पे लगता है रामराज्य आ गया मोदियुग में बहनो के लिए खुशखबरी

भारतवर्ष की महिलाओं माताओं बहनो नारियों पत्नियों बेटियों के मान सामान को ध्यान को रखते हुए आज सुप्रीम कोर्ट ने बहुत बड़ा फैसला सुनाया जो महिलाओ के मन की बात थी, जो आज सार्थक रूप से सच हो गई। सुप्रीम कोर्ट का फैसला में कहा गया की बेटियां हमेशा बेटी रहती है और बेटे तो सिर्फ शादी तक बेटे रहते है। आगे कहा की २००५ में जो संशोधन होने पहले भी किसी पिता की मृत्यु हो गई थी तो भी बेटियों को बेटों के बराबर पिताजी की सम्पत्ति में हिस्सा मिलेगा।

दिल्ली सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस श्री अरुण मिश्रा जी की बेंच ने लिया और बताया की ये ये २००५ उत्तराधिकार में संशोधन की व्याख्या है , जबरदस्त निर्णय और दे दिया भारत की बेटियों को अपने पिताजी की सम्पत्ति में बराबर बेटों के हिस्सा अब जो बेटी जहा पैदा हुई वहा उसके पिताजी की पैतृक सम्पत्ति में बराबर का हक़ होगा। उसके हिस्सेदारी को कोई भाई उसके से वंचित नहीं कर सकता उसको बराबर का हिस्सा देना होगा पिता की पैतृक सम्पत्ति का।

आगे सुप्रीम कोर्ट के फैसले में कहा गया की ५ सितंबर २००५ को भारत के संसद ने अविभाजित उत्तराधिकार में संशोधन कर दिया था हिन्दू परिवार उत्तराधिकार के लिए जो कहता की पैतृक सम्पत्ति में बेटियों का बराबर हिस्सा होगा बेटो के बराबर ही। और सबसे बड़ी बात कही गई सुप्रीम कोर्ट के द्वारा अपने अहम फैसले में की यदि ” ९ सितंबर २००५” को ये संशोधन को लागू हो गया था उसके पहले भी किसी इंसान की मृत्यु हो गई हो और उसकी सम्पत्ति का बंटवारा उसके मरने के बाद भी किया जा रहा हो उसमे भी बेटियों को बराबर की हिस्सेदारी देना पड़ेगा।

विस्तार से जानिये ये है क्या और कैसे बना कानून

ये बात उस समय की है जब १९८५ की और आँध्रप्रदेश के मुंख्यमंत्री श्री एन टी रामाराव हुआ करते थे , उनके द्वारा ही बेटियों को बराबर हिस्सा मिले पिता की पैतृक सम्पत्ति में पास किया थे। इसी कानून को असली जामा पहनाते हुए २० साल बाद संसद ने भी २००५ में उसी को देखते हुए उसका अनुसरण किया और पुरे भारतवर्ष देश के लिए पिता की पैतृक सम्पत्ति में बेटियों का बराबर हिस्सा मिले बेटो के बराबर कानून को पास कर दिया जिससे बेटिओं को कानून उत्तराधिकार हिस्सेदारी मिल सके। ये इसलिए हुआ क्यूंकि ये मामला भाइयों और बहनो बीच सम्पत्ति को लेकर था जो बंटवारा का पूरा मामला था। इसमें सुप्रीम कोर्ट में बहन के द्वारा ही गुहार लगाई गई थी की भाइयों को उसको अपने पिता की सम्पत्ति इसलिए बेदखल कर दिया की और पैतृक पिताजी की सम्पत्ति को बराबर देने से मना कर दिया की पिताजी की मृत्यु २००५ के ९ सितंबर के पहले हुई थी उसके मुताबिक ये संशोधन इस मामले में किसी भी तरह से लागू नहीं हो सकता।

सुप्रीम कोर्ट ने संज्ञान लेते हुए और मामले की पूरी जानकारी प्राप्त कर आखिर में अपना निर्णय सुनाया की ९ सितंबर २००५ के पहले भी यदि किसी भी पिता की मृत्यु हो गई हो तो भी बेटियों को बेटों के बराबर पैतृक पिताजी की सम्पत्ति में बराबर बराबर हिस्सा मिलेगा बहन भाई दोनों को ये निर्णय देके साफ साफ अपना फैसला के जरिये बता दिया की अब किसी भी बहनको अपने पिताजी पैतृक सम्पत्ति के हिस्से से कोई भी भाई बेदखल नहीं कर सकता और बहन भाई को बराबर की हिस्सेदारी मिलेगी पिताजी पैतृक सम्पत्ति में।

सुप्रीम कोर्ट ने आज अपनी टिप्पड़ी बहुत ही अहमियत रखती है क्यूंकि माता पिता से बेटिया ही हमेशा हमेशा पूरी जिंदगी प्यार करती रहती है, क्यूंकि बेटिया ही होती है जो अपने माता पिता की जन्म से मृत्यु तक सबसे प्यारी बेटिया रहती है अपने माता पिता की । जबकि उसके उलट देखा जाए तो शादी के बाद बेटो की नियत के साथ साथ उनके व्यवहार में बहुत बदलाव देखने को मिलते है मगर बेटियों की नियत में नहीं। जबकि माता पिता से बेटियों का प्यार अपनापन और बढ़ता जाता है शादी के बाद भी।

ये सब देखते हुए लगने लगा की अब रामराज्य आ गया है मोदियुग में. अब किसी के साथ अन्याय नहीं होगा इसके लिए सुप्रीम कोर्ट के ये निर्णय वर्तमान और दूरदृष्टि से बहुत ही न्यायसंगत है। अब हर महिला नारियों पत्नियों बेटियों बहनो को अपने पैतृक पिताजी की सम्पत्ति में बराबर हिस्सेदारी होगी और वंचित नहीं रहेगी। और साथ साथ ये निर्णय और भी अहम माना जायेगा की भारतवर्ष ही नहीं पुरे विश्व में महिलाओ बहनो को बराबर से अपना अपना काम बराबरी से कर रही है और उनको बराबरी से देखा जाता रहा है और देख रहे है उसको ही देखते हुए भी बहनो की पैतृक पिताजी की सम्पत्ति में उनके साथ कोई मनमानी या अन्याय ना हो उससे बचाया जा सके।

रामराज्य आते ही मोदियुग में मोदी जी द्वारा नारीशक्ति और बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ को जो मजबूती दी, उसी को आगे बढ़ाते हुए श्री जस्टिस अरुण मिश्रा जी ने अपने फैसले में साफ साफ कर दिया की बेटो के बराबर बेटियों को भी बराबर हिस्सेदारी मिलेगी पैतृक पिताजी की सम्पत्ति में और ये निर्णय नारीशक्ति को और भी मजबूत और ज्यादा ताकत प्रदान करेगा जिससे बहनो की शक्ति का पूरी तरह से रास्ता साफ़ हो गया।


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3 thoughts on “सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला अब पिता की सम्पत्ति में बेटो के बराबर ही बेटियों को हिस्सा मिलेगी। लगता है, आज जन्मष्टामी के शुभ अवसर पे लगता है रामराज्य आ गया मोदियुग में बहनो के लिए खुशखबरी

  • August 23, 2020 at 10:26 pm
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