कोर्ट ने दिए पुलिस को मंगला प्रसाद मिश्रा अपर संचालक मध्य प्रदेश जनसंपर्क की अंकसूची जब्त करने के आदेश

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मध्य प्रदेश जनसंपर्क विभाग : मंगला मिश्रा की योग्यता पर सवालिया

कोर्ट ने दिए पुलिस को मंगला प्रसाद मिश्रा अपर संचालक मध्य प्रदेश जनसंपर्क की अंकसूची जब्त करने के आदेश

खबर जारी  : VINOD MISHRA @ ANI NEWS INDIA

भोपाल। मध्य प्रदेश जनसंपर्क विभाग के अपर संचालक मंगला प्रसाद मिश्रा की फर्जी डिग्री मामले में भोपाल न्यायलय के न्यायिक मैजिस्ट्रेट प्रथम फ़र्स्ट क्लास श्री पुष्पक पाठक ने आज पुलिस को उक्त अंकसूची जब्त करने के आदेश जारी किये, उक्त प्रकरण में पुलिस पहले से ही जांच कर रही थी परन्तु आरोपी मंगला प्रसाद मिश्रा द्वारा अंकसूची पुलिस को नहीं प्रस्तुत नहीं कर रहा था कोर्ट ने गंभीरता से लेते हुए तय दिनांक तक बीए की अंक सूची को जप्त कर कोर्ट में पेश करने को कहा है। 

मध्य प्रदेश जनसंपर्क विभाग के अपर संचालक मंगला प्रसाद मिश्रा पर फर्जी डिग्री के आधार पर नौकरी पाने के सप्रमाण आरोप लगे है, प्रकरण में मंगला मिश्रा पर कई आरोप लगे है एक आरोप यह भी है कि मंगला मिश्रा की शैक्षणिक योग्यता मात्र दसवीं तक पढ़ें की है और शेष नौकरी में प्रस्तुत की गई अंकसूची डिग्री फर्जी है उसी आधार पर वह दैनिक वेतन पर विभाग में भर्ती हुए थे और आज जनसम्पर्क विभाग अपर संचालक एवं मध्य प्रदेश माध्यम के ( कार्यपालन संचालक ) है वहीं जनसंपर्क संचालनालय में पत्रकार कल्याण, पत्रकार अधिमान्यता, क्षेत्र प्रसार जैसे महत्वपूर्णएवं प्रभावशाली कार्य सौप रखे है। उन्हे एक के बाद एक पदोन्नति मिलती रही जाहिर है विभाग की मिलीभगत का नतीजा आज उजागर है।

सूत्रों की मानें तो मध्य प्रदेश जनसंपर्क विभाग में मंगला प्रसाद मिश्रा की शैक्षणिक योग्यता जानने के लिए अब तक सैकडों आदेवन सूचना के अधिकार के तहत दिए गए लेकिन उनका उत्तर नहीं दिया गया। सूत्र बताते हैं कि मंगला मिश्रा ने अपनी एक बीए की मार्कशीट दिखाई थी, जो 78-79 की है उस मार्कशीट की सत्यता पर भी सवालिया निशान लगे हैं, यहीं नहीं कहा तो यह भी जा रहा है कि विभाग के रिकार्ड में मंगला मिश्रा की शैक्षणिक योग्यता के दस्तावेज सही नहीं हैं।  सर्विस रिकार्ड में भी लिखे हुए में काट-छांट की गई है।

सूत्रों की मानें तो मंगला प्रसाद मिश्रा के पास उत्तरप्रदेश के प्रतापगढ़ के महाराणा प्रताप शिक्षा निकेतन विश्वविद्यालय की डिग्री है, जबकि इस यूनिवर्सिटी को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने फर्जी विश्वविद्यालय की सूची में डाल दिया है। मंगला मिश्रा की डिग्री को कैसे सही माना जाए। सवाल तो यहां भी खड़ा होता है कि जो व्यक्ति स्वयं को सर्वोच्च न्यायालय में अल्पज्ञानी बता रहा है उसने स्नातक में संस्कृत, अर्थशास्त्र और ‘सैन्य विज्ञान’ जैसे विषय में द्वितीय श्रेणी में परीक्षा कैसे उत्तीर्ण कर ली है। अब तक जिन लोगों ने भी मंगला मिश्रा की योग्यता जानने के लिए सूचना के अधिकार के तहत आवेदन दिए हैं उन्हे अब तक उसकी जानकारी नहीं दी गई, जबकि राज्य सूचना आयोग ने 2014 में अपने एक आदेश में कहा था कि सरकारी रिकार्ड खो जाने या लापरवाही से नष्ट हो जाने की स्थिति में जिम्मेदार व्यक्ति पर एफआइआर दर्ज होनी चाहिए।

इस मामले में मंगला प्रसाद ने पुलिस को दिए बयान में बताया वे दैनिक वेतन पर विभाग में भर्ती हुए थे पुलिस जांच में अंकसूची मांगने पर भी पुलिस को अपनी अंकसूची नहीं दी कहा कोर्ट के माँगने पर देंगे। पुलिस ने अपनी रिपोर्ट में कोर्ट को जानकारी दी की जनसम्पर्क विभाग एवं मध्य प्रदेश माध्यम उनके दोनो विभाग से जानकारी प्राप्त हुई की उनकी अंकसूची रिकॉर्ड मेँ नहीं है. उक्त मामले में भोपाल न्यायलय के न्यायिक मैजिस्ट्रेट प्रथम फ़र्स्ट क्लास श्री पुष्पक पाठक ने 7 मई 2018 को थाना प्रभारी एमपी नगर तथा मान. कुलसचिव इलाहाबाद विश्वविद्यालय को पत्र लिख कर अंकसूची जब्त करने आदेशित किया। जप्ती दस्तावेज और रिपोर्ट पेश करने की तिथि 11 जून 2018 नियत की।

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