बॉलीवुड की शेरनी कंगना रनौत की राजनीती में हो रही है एंट्री, एक्ट्रेस जयललिता और स्मृति ईरानी के बाद जल्द कंगना की दहाड़ भी सुनाई क्यों नहीं दे सकती ?

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ANI NEWS INDIA @ http://aninewsindia.com

मुंबई // गुणवंत सिंह बघेल : 9967086023

 

बॉलीवुड की शेरनी कंगना रनौत की राजनीती में हो रही है एंट्री, एक्ट्रेस जयललिता और स्मृति ईरानी के बाद जल्द कंगना की दहाड़ भी सुनाई क्यों नहीं दे सकती ?

शेरनी कंगना रनौत बॉलीवुड की सुपर स्टार अपनी मेहनत और अदाकारी के बल पे बनी नाकि की किसी रहमोकर्म पे ? इसी को देखते हुए, चंद मुट्ठीभर लोगों को परेशानी हो रही है की कंगना राजनीती में ना आने पाए। क्यूंकि वो अपने विचारो को बड़ी तरीके से लोगो के सामने कहती है , और यही अदा जनता में दिन बा दिन कंगना रनौत को लोकप्रिय बनाती जा रही है। शेरनी कंगना हिम्मती होने के साथ स्पष्ट जबाब देने में उनका कोई बराबरी नहीं कर सकता , हाँ उसकी बराबरी करने वाले जरूर उसको और मजबूत ताकतवर बनाने में सहयोगी हो रहे है। जो कंगना के लिए तो और भी अच्छा है।

चंद मुट्ठीभर लोग शेरनी कंगना रनौत के बीते ही अतीत में झाँका झांकी करने से बाज नहीं आते ? और उनकी अश्लील फोटो का मैं बनाकर उनका मजाक उड़ाने से बाज नहीं आते। और तरह तरह के प्रश्न उठाते है और उनके चरित्र हरण कर रहे है, जो एक चरित्र हत्या से कम नहीं है। इस तरह की हरकत करने वाले ये वही लोग है, जिनको अपने अतीत का ज्ञान नहीं है या भुला बैठे है ? या बात करने से कतराते है डरे सहमे हुए रहते है। क्यूंकि कही धोखे से भी इन मुट्ठीभर लोगों की लिबरल , सेक्युलर , महिलावादी का ढोंग ना जनता के सामने खुल जाए।

शेरनी कंगना रनौत इतनी बड़ी सुपर स्टार कैसे बन गई इतनी सी उम्र में ? जो लोगो को पांच नहीं रही है , इसलिए ऊंटपटांग बकबास करने से नहीं चूकते। अरे कंगना रनौत ने किसी सहारा नहीं लिया होगा ? अपने जीवन में कभी कोई समझौता नहीं की ? और तो और बड़े बड़ी फ़िल्मी हस्तियों के ऑफिस में रात दिन ख़ाक नहीं छानी होगी? अरे किसी को नीचा दिखाना या बदनाम करने के लिए कुछ भी बोल देना, अच्छी बात नहीं। बोलने से पहले १० बार सोचो समझो फिर कहो क्यूंकि कही वही बात खुद के साथ आने वाले समय घूमकर ना आ जाए ? क्यूंकि वक्त का पहिया घूमता जरूर है।

शेरनी कंगना रनौत ने लोगो का फेवर जरूर ली होंगी , और समझौते भी किये होंगे। और बड़ी बड़ी फ़िल्मी हस्तियों के चक्कर लगाने में दर दर खाक कहानी तो क्या ? उसने किया तो इसमें शर्म की क्या बात है ? कोई एक दिन बड़ा सुपर स्टार यूँ ही नहीं बन जाता है , उसके अपना खून पसीना बहाना पड़ता है। तब जाके आपको आपकी मंजिल मिलती है, और वो खुद की विरासत होती है, नाकि माता पिता की विरासत मिलने से अपने को मेहनत करने वालो के बराबर समझने लगते है ? अरे नहीं वो वंशवाद की विरासत होती है. उन चंद लोगों को चुल्लूभर पानी में अपना मुहं छुपा लेना चाहिए शर्म के मारे , जिन लोगों इस का वातावरण बना रखा है।

शेरनी कंगना रनौत सुपर स्टार की तरह बनने के लिए, और अपनी किस्मत आजमाने के लिए. साथ साथ अपने सपने पुरे करने के लिए हजारो लड़किया सपनो के शहर मुंबई आती है हर साल, और वो भी कंगना की तरह अभिनेत्री बन सके। और बहुत सी लड़किये निराश होके लौट भी जाती है ? बहुत कम ही लड़कियां होती है , जो कंगना रनौत की तरह सफल अभिनेत्री बन पति है। ये उनका अपनी मेहनत और नसीब पर निर्भर करता है।

शेरनी कंगना रनौत ने अपने जीवन में बहुत सी कठिनाई और तकलीफों को सहते हुए , इतना सब बर्दास्त करने के बाबजूद उसने निजी जीवन में समझौता नहीं की। और नाही कभी धर्म से और देश से समझौता नहीं की कभी भी , और किसी भी लॉबी या गेंग कह लीजिये उसका कभी भी हिस्सा नहीं हुई। जीवन में जैसे जैसे आगे बढ़ती गई , नई नई ऊंचाइयों को छूती गई। और अपनी सूझबूझ समझदारी के बदौलत पुरुष प्रधान फिल्म इंडस्ट्रीज अपनी एक अलग पहचान बनाई अपने दम पे , जो एक महिला का सराहनीय सम्मानीय कदम मन जायेगा। क्यूंकि महिला होने के बाबजूद कंगना ने महिलाओ से जुडी फिल्मे बनाई , साथ ही महिलावाद का झुनझुना बजाने वालो के मुहं में जोरदार तमाचा जड़ा अपनी सफलता से। बड़ी बड़ी बातें नहीं की, नाही ही कोई हल्ला मचाया ? दूसरे लोगो की तरह जो बोल बच्चन ज्यादा झड़ते है। कंगना ने ये मुकाम अपने कर्म करके अपनी मेहनत से पाई है नाकि बोल बच्चन के ? इसलिए चंद मुट्ठीभर लोगों को लगता है की , या जिनको नारीवादियों को रिया चक्रवर्ती में ब्राह्मणवाद दीखता है कंगना रनौत में नहीं दीखता (पेट्रीआर्की)

कुछ लोग कहते है की , इस शहर ने दौलत और शोहरत दी बड़ी बड़ी बातें करते है ? ये दिया वो दिया। कोई भी शहर किसी को कुछ देता तो उनके शहर में हजारो भीख मांगने वाले बेचारे गरीब लोग नहीं मिलते हर सिग्नल चौराहे पे ? सबको अपने दम पे और अपनी मेहनत से कमाना पड़ता है , कोई किसी को कुछ नहीं देता किसी भी शहर में ? भारतवर्ष सबका है , कोई भी भारतवासी भारत के किसी भी कोने में जाके अपनी जीविका चला सकता है। ये उसका मानव अधिकार है , मगर चंद मुट्ठीभर लोग जो प्रांतवाद के नाम पे अपनी रोटी सकते है. और लोगों को बरगलाने का काम करते है। और लोगों में बाहरी बोल बोल के जहर घोलने के काम करते है , जो कोई भी भारतीय नागरिक स्वीकार नहीं करेगा। पुरे भारतवर्ष में किसी भी शहर में जाओ उस शहर में पुरे भारतवर्ष के हर शहर के लोग मिल जायेंगे , इसलिए उनके साथ भी कोई इस तरह की हरकत ना करे इससे बचना चाहिए। कोई बाहरी नहीं सबका देश है।

शेरनी कंगना रनौत से चंद मुट्ठीभर लोगों को बड़ी तकलीफ होती है जब उसकी तुलना झांसी की रानी की जाती है अरे भाई क्यों तकलीफ होती है क्या वो भी भारत की बेटी नहीं है ? इसमें दिक्कत क्या है। जब एक राजनैतिक घराने के राजकुमारी को हिन्दुओ के देवी भगवती मातारानी मां दुर्गा से के बराबर रखकर तुलना की जाती है? तब किसी को कोई दिक्कत नहीं होती क्यों? क्यूंकि वो बड़े रसूकदार के साथ उसका उपनाम ही सरनेम है। यही उसकी उपलब्धि है ? तो शेरनी कंगन रनौत से क्यों दिक्कत है ? क्यूंकि वो एक मामूली परिवार से आई है इसलिए पांच नहीं रही है।

शेरनी कंगना रनौत आज एक सुपर स्टार है और बॉलीवुड का सबसे सफल नाम है। इसलिए उनके के अतीत की बात ही ना करे की, वो १०-१५ वर्ष पहले क्या करती थी ? क्या बोलती थी ? और क्या सोचती थी ? इस तरह की बातें ना ही करे तो बहुत अच्छा होगा ? क्यूंकि चंद मुट्ठीभर इस तरह की बात करने वाले बता सकते है की, वो १०-१५ वर्ष पहले क्या सोचते थे ? क्या बोलते थे ? क्या करते थे ? क्या समझते थे ? ये जानकारी तो बोलने वालो आपको भी नहीं मालूम होगी। बड़ी बड़ी बातें करवा लो बस बतोलेबाजी बक बक बकबास। आप बताओ १० वर्ष पूर्व किस तरह का प्रधानमंत्री चुनते थे ? और आज के दौर में कैसा प्रधानमंत्री को चुने है। ये समझना जानना इतना भी मुश्किल भी नहीं होगा।

भारतवर्ष ने आज तक जितनी वैचारिक दुरी को देखा और तय की है , उतनी ही शेरनी कंगना रनौत भी दुरी तय की है। इसलिए उसके विचार के लिए कंगना को सराहना मिलनी चाहिए नाकि आलोचना मिलनी चाहिए ?

बॉलीवुड की सुपर स्टार आज की शेरनी कंगना रनौत अपने जीवन के उस ऊंचाई मे अपने बलबुत पहुंची है , और अपना कैरियर बनाई और बुलंदियों के मुकाम जा कड़ी हुई है। जहाँ पर पहुँचने के बाद एक गलती भी उनके वर्षो वर्षो की मेहनत को पानी में मिला देगी। इसलिए उसने अपना हित ना देखते हुए देश के साथ कड़ी नजर आई, और अपने भारतवर्ष के किसी भी शहर का नागरिक ना देखते हुए उसके लिए आवाज उठाई (सुशांत सिंह राजपूत मर्डर मिस्ट्री ) और अपनी कमाई जीवनभर की पहचान को दांव पर लगा दी। ये आमतौर में कही भी नजर नहीं आता, हिन्दू जैसे जैसे तरक्की करता जाता है, और अपनी मंजिल को पाने में सफलता होता है। वो अपनी जड़ों के साथ साथ अपनी पहचान से भी दूर होता चला जाता है , इसका उदाहरण देखने को भी मिलता रहता है समय समय ? बड़े बड़े महानायक दिग्गज लोग मजार में तो कभी दरगाह में माथा टिकाते मिल जायेंगे ? और जब देश की बात आएगी , असल के मुद्दे आएंगे तब इन लोगो से एक ट्वीट तक करने का समय नहीं मिलता। की एक ट्वीट के माध्यम से ट्वीट कर दे मगर नहीं ?

शेरनी कंगना रनौत की दहाड़ से कुछ लोगों की नींद उड़ गई है , कही वो राजनीती में कदम ना रख दे। इसलिए उनको तकलीफ हो रही है , और पेट में मरोड़ उठ रही है। शेरनी कंगना रनौत की विचारधारा में स्पष्ट के साथ साथ मेहनती लड़की है, इसलिए क्यों नहीं आना चाहिए उनके राजनीती में ? उनमे सर्वगुण है एक राजनैतिक नेता बनने के। और वो आती है राजनीती में टी इसमें नया क्या होने जा रहा है जो तकलीफ हो रही है चंद मुट्ठीभर लोगो को। क्या इसके पहले हेमा मालिनी , जाया प्रदा , जया बच्चन के साथ साथ दर्जनों फ़िल्मी एक्ट्रेस राजनीती में आई है। मगर उनका स्टारडम उनक सभी एक्ट्रेस का बोझ ही बना रहा।

भारतवर्ष के एक हिस्से में तमिलनाडु की स्वर्गीय मुंख्यमंत्री श्री जयललिता “अम्मा” भी एक जमाने में एक सुपर स्टार अभिनेत्री थी , और जयललिता जी का सफर भी इसी तरह जयललिता से “अम्मा” बनने तक का था।

उसी तरह सीरियल के सबसे सफल एक्ट्रेस अदाकारा स्मृति ईरानी भी एक एक्ट्रेस थी , और एक युवराज को उसके गढ़ से खदेड़ दिया। इसलिए शेरनी कंगना रनौत भी राजनीती में अपनी जबरदस्त विचारधारा को मुखर आवाज के साथ जरूरतमंदो की की आवाज बनके उनकी आवाज को बुलंद करती है तो इसमें क्या गलता है ? और किसी को क्यों दिक्कत होती है।


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