पितृ पर्व सर्वपितृ अमावस्या पर लगातार पांचवे वर्ष सामूहिक तर्पण।

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ANI News india: http://aninewsindia.com

जिला ब्यूरो चीफ उज्जैन // विष्णु शर्मा : 8305895567

पुण्यदायिनी चम्बल के जल में आस्था के पिंड विसर्जित 

नागदा- महालय सोलह श्राद्ध सर्वपितृ अमावस्या के पावन अवसर पर प्रतिवर्षानुसार सहस्त्र औदिच्य युवाओं द्वारा चम्बल तट पर शृद्धालुओं के
सामूहिक तर्पण व पितृकर्म का आयोजन सफलता पूर्वक सम्पन्न हुआ।

कार्यक्रम के संयोजक निलेश मेहता ने बताया की विद्वतजन के कथनानुसार चम्बल नदी में देश की 99वे नदियों का मिलन होता है, इसलिए यहाँ धार्मिक कर्म करने से अत्यंत पुण्यदायी होकर गंगा नदी के समकक्ष पूण्य प्राप्त होता है। नगरवासियों द्वारा अपने पितरो के मोक्ष हेतु धार्मिक कर्म करने की भावना को तृप्त करने के उद्देश्य से स्थानीय स्तर पर कार्यक्रम आयोजन किया जाता है। जो पितृकर्म करना चाहते है, लेकिन समयाभाव व धनाभाव के कारण तीर्थ स्थल पर नही जा पाते। आमजन के आग्रह पर यह आयोजन लगातार पांच वर्षों से किया जा रहा है, जिसकी सराहना सम्मिलित होने वाले लोगो ने की। भविष्य में कार्यक्रम अनवरत रखने हेतु प्रेरित भी किया।

कार्यक्रम गुरुवार को प्रातः 8 बजे प्रारम्भ होकर 11.30 बजे हवन के साथ सम्पन्न हुआ। पुण्यदायिनी माँ चम्बल तट पर बाल हनुमान मंदिर पर कर्मकांड विद ब्राह्णण पंडित अजय पंड्या व पंडित दीपक पंड्या के आचार्यत्व में विधि पूर्वक मंत्रोच्चारण के साथ पित्र पूजन व कुटुम्ब की 71 पीढियो मोक्ष व आत्मशांति हेतु श्राद्ध व तर्पण किया। जिसमे उत्साहपूर्वक बड़ी संख्या में नागदा, खाचरोद व आसपास से सभी समाज के महिला, पुरुष व बच्चो ने सम्मिलित होकर पुण्यलाभ लिया। अ.भा. औदिच्य ब्राह्मण महिला जिला अध्यक्ष निर्मलाजी रावल,राजेंद्र जी त्रिवेदी मुखिया, सहस्त्र औदिच्य युवा संरक्षक सुमित दवे, युवा तहसील अध्यक्ष सचिन शिकारी, सांस्कृतिक सचिव मनीष व्यास, पंकज त्रिवेदी, वंदना रावल, अजय पण्ड्या, दीपक पण्ड्या, निलेश मेहता, मुकुन्द मेहता, संजयसिंह राणावत आदि मौजूद रहे। आगंतुक जनो ने पीड़ा व्यक्त की कि इस तरह के धार्मिक आयोजन हेतु नदी किनारे स्थायी घाट  या निश्चित स्थान के अभाव में परंपरा निर्वहन में असुविधा का सामना करना पड़ता है।

कार्यक्रम के सहभागी बने सभी बंधुओ का आभार औदिच्य युवा अध्यक्ष नीलेश मेहता ने माना व अगले वर्ष आयोजन को बड़े स्तर पर आयोजित करने का कहा, जिससे इस पुण्य कार्य हेतु शहर से बाहर जाकर सम्पन्न करने वाले लोग अपने शहर में ही विधि विधान से पूजन कार्य सम्पन्न कर सके। 


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