मां का शव पाने के लिए बेटा कलेक्टर से अस्पताल प्रबंधन को फोन कराने के लिए भटकता रहा,

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ANI News india: http://aninewsindia.com

जिला ब्यूरो चीफ उज्जैन // विष्णु शर्मा : 8305895567

शर्मशार घटना सीएम की चौखट पर पहुंची

कैलाश जी सनोलिया

नागदा । मां का शव पाने के लिए बेटा तीन घंटे तक भटकता रहा। अस्पताल प्रबंधन इस जिद पर अड़ा था कि कलेक्टर या एडीएम से फोन के बाद ही शव मिलेगा। यहां तक स्थिति बन गई कि एक निर्धारित समय तक बेटा कलेक्टर तक एप्रोच नहीं कर पाया तो उसकी मां का शव उसे नहीं देते हुए सीघे मुक्तिधाम उज्जैन तक पहुंंचाने की कार्यवाही शुरू हो गई। एक तो मां को खोने का दर्द और दूसरा लचर व्यवस्था ने उस बेटे को तथा परिजनों को कलेक्टर से एप्रोच कराने के लिए मानसिक त्रासदी का शिकार होना पड़ा। इस शर्मशार घटना की कहानी नागदा जिला उज्जैन के एक परिवार से जुड़ी है। इस शिकायत को जिला कांग्रेस ने गंभीरता से लिया और गुरूवार को सीएम तथा कलेक्टर उज्जैन तक मामला भेजा है। जिला कार्यवाहक अध्यक्ष सुबोध स्वामी ने शिकायत कर इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृति रोकने के लिए कलेक्टर उज्जैन से व्यवस्था में सुधार की मांग की है।

*आखिर क्या है पूरा मामला*
अन्य बीमारी से पीडि़त महिला रुक्माबाई पति रामचंद परमार उम्र 56 वर्ष निवासी नागदा को आरर्डीगार्डी मेडिकल कॉलेज में लगभग सात दिनों पहले भर्ती किया गया था। उसकी जांच रिपोर्ट कोराना नेगेटिव आई थी। महिला की मौत अस्पताल में ही उपचार के दौरान 15 सिंतबर को हो गई।

*अस्पताल प्रबंधन अपनी बात पर अड़ा रहा*

महिला के परिजनों से जुड़े सूत्रों ने बताया कि आरडीगार्डी मेडिकल कॉलेज प्रबंधन शव देने को तैयार था, लेकिन शर्त रखी कि कलेक्टर या एडीएम से फोन कराने पर ही शव दिया जाएगा। महिला का बेटा व उसके मित्र कलेक्टर से मिलने के लिए कोठी पर पहुंचे तो पता चला कि कलेक्टर साहब मीटिंग में है। एडीएसम भी नहीं मिले। पूरा परिवार एप्रोच के लिए मानसिक पीड़ा से गुजरता रहा। समय जब अधिक हो गया तो इस दौरान अस्पताल प्रबंधन ने महिला का शव का अंतिम संस्कार करने के लिए वाहन बुलाकर उसे मुक्तिधाम उज्जैन में ही पहुंचाने की तैयारी कर दी। संयोग था कि नागदा तथा उज्जैन के पत्रकारों तक यह मामला पहुंचा। पत्रकारों की मदद से आखिरकार अस्पताल प्रबंधन तक प्रशासनिक अधिकारी का फोन पहुंचा और महिला का शव परिजनो को दिया गया। इस दौरान पूरा परिवार घंटो तक कलेक्टर से बात करने के लिए मशक्कत करता रहा। बताया जा रहा है कि परिजनों के शुभ चितकों ने सीधे कलेक्टर से मोबाइल पर संपर्क किया लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।

*कांग्रेस ने कलेक्टर को भेजी शिकायत*

(1) जिला कांग्रेस कार्यवाहक अघ्यक्ष सुबोध स्वामी ने सीएम एवं कलेक्टर को शिकायत के साथ यह मांग रखी है कि जब कोरोना नेगेटिव रिपोर्ट किसी की आ रही है और उसकी मौत पर शव प्राप्त करने के लिए परिजनों से एडीएम आदि से अस्पताल प्रबंधन से फोन कराना कहां तक उचित है। परिजन एक तो अपने को खोने के गम और फिर ओहदेदार अधिकारी से कैसे सिफारिश संभव है। आम आदमी ऐसा कतई नहीं कर सकता। ऐसी स्थिति में अस्पताल प्रबंधन स्वयं एडीएम से संपर्क करें या फिर कलेक्टर इस प्रकार की त्रुटिपूर्ण व्यवस्था में सुधार करने का आदेश प्रदान करें। जिससे एडीएम से फोन कराने की बात की जगह अन्य विकल्प तलाशा जाए।

(2) अवकाश का दिन होने पर प्रशानिक अधिकारी से कैसे आम आदमी अपने परिजनों का शव लेने के लिए फोन करा सकेगा।

(3) स्वामी की शिकायत के मुताबिक आरर्डीगार्डी मेडिकल कॉलेज प्रबंधन प्रशासन के नियमों का हवाला देेकर परिजन की मौत से गम में डूबे लोगों को मानसिक त्रासदी का शिकार भी बना रहा है।

(4) जिला कांग्रेस कार्यवाहक अध्यक्ष ने इस प्रकार की शर्मसार घटना की जांच कराने की मांग के साथ दोषी अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ कार्यवाही की मांग की है।

*अन्य घटना का भी उल्लेख*

स्वामी ने अपनी शिकायत में नागदा की एक अन्य महिला शांति देवी मेहता की इस अस्पताल में मौत को लेकर भी कई सवाल खड़े किए है। शिकायत में महिला के आभूषण अस्पताल में भर्ती के दौरान गायब होने का मामला भी उठाया गया है।


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