लिहदा के ग्रामीणों ने मांगी भूमि के बदले भूमि बांध निर्माण के लिए अधिगृहित की जाएगी किसानों की भूमि

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ANI NEWS INDIA @ http://aninewsindia.com

ब्यूरो चीफ मुलताई, जिला बैतूल // राकेश अग्रवाल : 7509020406

 

मुलताई। मुलताई ब्लाक के ग्राम लिहदा के दर्जनों ग्रामीणों ने सोमवार को तहसील कार्यालय पहुंच कर तहसीलदार को ज्ञापन सौपंकर बांध के लिए अधिगृहित की जाने वाली जमीन के बदले जमीन देने की मांग की है। ग्रामीणों ने बताया कि प्रस्तावित लिहदा बांध ग्रामीणों के लिए नुकसान देह है। इसलिए बांध निर्माण प्रक्रिया पर भी रोक लगाने की मांग ग्रामीणों द्वारा की जा रही हैे।

ब्लाक कांग्रेस कमेटीर अध्यक्ष किशोर सिंह परिहार के नेतृत्व में सौंपे ज्ञापन में किसानों ने बताया कि लिहदा बांध निर्माण होता है तो जिन किसानों की भूमि बांध के अधिग्रहण में जा रही है। उन सभी किसानों को उतनी ही कृषि योग्य भूमि दी जाए। साथ ही किसानों ने कहा कि बांध निर्माण में प्रभावित होने वाले किसानों के परिवारजनों को शासकीय नौकरी दी जाएख् वहीं किसानों की सहमति से ही भूमि का अधिग्रहण किया जाए। किसान सुरेश धोटे, गुणवंत धोटे, नत्थू जागरे, मानीकराव बारस्कर ,कृष्णा भोपते, संतोष राव सराटकर, विश्वनाथ बारस्कर, उमराव भोपते, शंकर धोटे, गजानंद भोंपते ,भगवत राव धोटे ,गुलाबराव धोटे, लीलाधर कावरे उत्तम धोटे, गोविंदराव धोटे, रामनाथ पाटिल आदि किसान ज्ञापन सौंपते समय प्रमुख रूप से उपस्थित रहें।

चार गांव के सैकड़ों किसान होंगे प्रभावित

जल संसाधन विभाग मुलताई के माध्यम से बनने वाली लिहदा लघु सिंचाई परियोजना में लिहदा सहित आसपास के चार गांव के सैकड़ों किसान प्रभावित होंगे। किसानों की कुल भूमि 111.732 हैक्टयर अधिग्रहण किया जाना है। जिसके एवज में शासन 12करोड़ 68 लाख रुपए की राशि मुआवजे के रूप में इन किसानों को देगा। इस बांध से प्रभावित होने वाला दूसरा बड़ा ग्राम जामगांव है, जहां के 63 किसानो की भूमि अधिग्रहण किया जाना है। यहा कुल भूमि 88.305 हैक्टर अधिग्रहण किया जाना है। जिसके एवज में किसानों को11 करोड़ रुपए की राशि मुआवजे के रूप में दी जाएगी। इसके अलावा सेमला के 3 किसान और तावला के 6 किसान इससे प्रभावित होंगे।

भूमि चली जाएगी तो किसान खेती कैसे करेंगे

लिहदा के किसानों का कहना है कि यदि उनकी भूमि ही चली जाएगी तो बांध उनके किस काम आएगा। यदि उनके पास भूमि ही नहीं रहेगी तो किसान कहां खेती करेंगे और आगे अपने परिवार का पालन कैसे करेंगे। भूमि जाने से किसानों का भविष्य अधर में लटक जाएगा। किसानो ंने बताया कि कुछ किसान ऐसे है जिनकी पूरी की पूरी भूमि डूब क्षेत्र में जा रही है। किसानों ने आरोप लगाते हुए कहा कि बांध परियोजना में किसानों का पक्ष नहीं सुना गया और ना ही उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया। किसानों की सिंचित भूमि को असिंचित बता कर मौजे का निर्धारण किया गया जो कि अन्यायपूर्ण है। किसान इसके खिलाफ आंदोलन करेंगे।

1195 हैक्टयर भूमि होगी सिंचित

जल संसाधन विभाग मुलताई के माध्यम से बनने वाले लिहदा बांध से 1195 हैक्टर भूमि सिंचित हो सकेगी। जल संसाधन विभाग के एसडीओ सीएल मरकाम ने जानकारी देते हुए बताया कि अगर किसानों को कोई समस्या है तो इसका हल मिल बैठकर खोजने का प्रयास किया जाएगा। किसी भी योजना का उद्देश्य क्षेत्र विकास से जुड़ा होता है। जिसमें सभी का सहयोग आवश्यक है। उन्होंने किसानों से इस संबंध में चर्चा कर सभी को संतुष्ठ करने का आश्वासन दिया है।


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