यूपी पुलिस ने बिना परिवार के सदस्यों के हाथरस गैंगरेप पीड़िता का 2.30 बजे सुबह अंतिम संस्कार किया

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ANI NEWS INDIA @ http://aninewsindia.com

विशेष संवाददाता

 

हाथरस बलात्कार पीड़िता का परिवार अंतिम संस्कार करने से पहले शव को घर ले जाना चाहता था, सूर्योदय से पहले उसका जबरिया अंतिम संस्कार करने का फैसला किया.
हाथरस में पीड़िता का देररात जबरन अंतिम संस्कार कराए जाने की खबर को लेकर एसपी विक्रांत वीर ने इस बात की जानकारी मिडिया को देने से मना कर दिया

दरअसल, परिजन रात में शव का अंतिम संस्कार नहीं करना चाहते थे, जबकि पुलिस तुरंत अंतिम संस्कार कराना चाहती थी. इसके बाद आधी रात करीब 2:30 बिना किसी रीति रिवाज के और परिजनों की गैरमौजूदगी में पीड़िता का अंतिम संस्कार कर दिया. इतना ही नहीं पुलिस और पीएसी के जवानों ने घेराबंदी कर मीडिया को भी कवरेज करने से रोक दिया

 

हालांकि हाथरस के ज्वाइंट मजिस्ट्रेट प्रेम प्रकाश मीणा ने इन आरोपों को गलत बताया है. उनका कहना है कि शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पीड़िता के परिवार वालों की अनुमति से और उनके सहयोग से अंतिम संस्कार किया गया है. इसमे किसी भी तरह की कोई अड़चन नहीं आई. बाकी के सभी आरोप बेबुनियाद हैं. वहीं इस बारे में जब पुलिस अधिकारियों से बात करनी चाही तो उन्होंने मना कर दिया.
क्या पीड़िता का अंतिम संस्कार जबरन रात में किया गया. पीड़ित परिवार को शव भी नहीं दिया गया. मृतका का चेहरा भी घर वालों को नहीं दिखाया गया. अंतिम संस्कार के लिए परिवार से अनुमति भी नहीं ली गई.

इन आरोपों पर बात करने के लिए सबसे पहले सादाबाद के सर्किल अफसर ब्रह्रम सिंह से बात की गई. चंदपा थाना और पीड़ित परिवार का गांव इन्हीं के इलाके में आता है. सीओ ने पूरी बात सुनने के बाद कहा कि इस मामले पर मैं कुछ नहीं बोल सकता है. उन्होंने मीडिया कर्मियों को भी कवरेज करने से रोका और स्पष्ट जानकारी नहीं दी कि आखिर यह अंतिम संस्कार किसका हो रहा है यहां पर क्या चीज जल रही है।

सवाल यह उठता है कि आखिर किस किस आरोपियो को बचाने के लिए पूरी उत्तर प्रदेश की योगी सरकार इस मामले में प्रशासन और पुलिस की मदद से अपराध को छुपाने का प्रयास कर रही है। पूरे देश में इस घटनाओं को लेकर जुलूस धरना प्रदर्शन का माहौल बना हुआ है देश की जनता चाहती है कि पीड़िता को जल्द से जल्द न्याय मिले परंतु जो स्थिति पुलिस प्रशासन द्वारा निर्मित की गई है उससे यह लगता है कि पीड़िता को न्याय मिलना असंभव है


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