कमलनाथ के विवादित बयान का मामला, कमलनाथ ने मॉफी मांगने से क्यों किया इंकार?

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भोपाल, विजया पाठक

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कमलनाथ की मॉफी मतलब कांग्रेस की मॉफी होती
क्या कांग्रेस को बेचना चाहते हैं कमलनाथ?

पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ का इमरती देवी को लेकर दिए गए बयान पर गरमाई मध्यप्रदेश की सियासत थमने का नाम नहीं ले रही है। बयान पर अब कमलनाथ मुश्किलों में घिरते नजर आ रहे हैं। उन्होंने ‘आइटम’ वाले बयान पर सफाई दी है और माफी मांगने से इनकार किया है। कमलनाथ ने सफाई पेश करते हुए कहा कि मैंने आइटम कहा है, क्योंकि यह अपमानजनक शब्द नहीं है। लोकसभा और विधानसभा में कार्यसूची को आइटम नंबर लिखा जाता है। तर्कहीन सफाई देकर कमलनाथ बचना चाहते हैं। लेकिन बयान के बाद कमलनाथ की मानसिकता और पार्टी के प्रति वफादारी पर ही सवाल उठने लगे हैं। उनके मॉफी नही मांगने वाले बयान से तो यही लग रहा है। गलत बयान देकर मॉफी मांगने से वह छोटे नही हो जाते लेकिन यहां उनका अहम आगे आ रहा है। उनका अहंकार और ओहदा कांग्रेस को गर्त में पहुंचा रहा है। यदि कमलनाथ मांफी मांगते तो यह पार्टी की मॉफी होती और एक प्रभावी संदेश जाता। क्योंकि यहां कमलनाथ मतलब कांग्रेस पार्टी है। पार्टी के‍ बिना उनका कोई अस्तित्व नही है। पर वह ऐसा करके अपने आपको छोटा नहीं बताना चाहते। उनकी नजर में पार्टी उनसे छोटी है।

यह बात सत्य है कि कमलनाथ के बयान के पहले प्रदेश में हो रहे उपचुनावों में कांग्रेस की अच्छी लहर थी। लोगों को भी कांग्रेस के प्रति सहानुभूति थी। लेकिन विवादित बयान के बाद स्थिति बिल्कुल बदल गई है। इन चुनाव में बीजेपी के पास कोई मुदृा नहीं था। अब बीजेपी इस बयान को खूब तूल दे रही है। बावजूद इसके कमलनाथ ने स्थिति को नही संभाला। यदि वह चाहते तो माफी मांगकर मामले को शांत कर सकते थे। पर उन्होंने ऐसा करना मुनासिब नही समझा। इससे तो यही लग रहा है कि उन्होंने जानबूझकर कांग्रेस को डुबोने का मन बना लिया है। प्रदेश में पार्टी का मुखिया केवल पार्टी विशेष का मुखिया नही होता वह पूरे प्रदेश का मुखिया होता है। उससे प्रदेश की जनता की आशाएं बंधी होती हैं। लेकिन कमलनाथ जैसे मुखिया को होना प्रदेश के लिए हानिकारक ही साबित होगा। निश्चित तौर पर कमलनाथ के इस बयान से कांग्रेस शर्मसार हुई है। जिसकी भरपाई शायद ही कभी हो पाएगी। प्रदेश स्तर पर तो पार्टी को इसका नुकसान उठाना पड़ेगा।

राष्ट्री्य स्तर पर भी आगे चलकर इस बयान की कीमत पार्टी को चुकानी पड़ेगी। क्योंकि उनका यह विवादित बयान देश की आधी आबादी से जुड़ा है।
उधर राहुल गांधी ने भी कमलनाथ के इमरती देवी को लेकर दिए बयान को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। राहुल गांधी का कहना है कि वह इस तरह की भाषा पसंद नहीं करते हैं, फिर वह किसी भी शख्स द्वारा इस्तेमाल की गई हो। उन्होंने कमलनाथ को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि हमें महिलाओं का सम्‍मान करना चाहिए। इस तरह की भाषा का महिलाओं के लिए इस्तेमाल मुझे कतई पसंद नहीं है। कांग्रेस पार्टी हाईकमान को यदि मध्यप्रदेश में कांग्रेस को बचाना है तो सबसे पहले कमलनाथ से पार्टी को बचाना होगा। क्योंकि अब कमलनाथ पार्टी को गर्त में पहुंचाने का पूरा मन बना चुके हैं।

पार्टी नेताओं को दूरी बनाना, स्वयं को पार्टी से ऊंचा समझना और विवादित बयानबानी करना उनके लिए आम बात हो चुकी है। वह भले ही यह कहते हो कि उन्होंने पार्टी को मजबूती प्रदान की है लेकिन सच्चाई में देखा जाए तो उनके कारण ही आज प्रदेश में कांग्रेस की सरकार नही है। हाईकमान को पार्टी के भविष्य की तस्वीर खींचना है तो कमलनाथ जैसे नेता को समझना और समझाना बहुत जरूरी है।


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