प्रकृति के अनुरूप उपचार की पुरातन व सनातन व्यवस्था है आयुष- राज्य मंत्री जालम पटैल

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ANI NEWS INDIA @ www.aninewsindia.com

व्यूरो चीफ गाडरवारा // अरूण श्रीवास्तव : 8120754889

नरसिंहपुर, 01 जुलाई 2018. राष्ट्रीय आयुष मिशन के अंतर्गत जिले के ग्राम झामर में आयुष ग्राम योजना का शुभारंभ आयुष, कुटीर एवं ग्रामोद्योग (स्वतंत्र प्रभार) और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी राज्य मंत्री श्री जालम सिंह पटैल और सांसद श्री राव उदय प्रताप सिंह ने रविवार को किया। प्रारंभिक चरण में मध्यप्रदेश शासन के आयुष विभाग द्वारा प्रदेश के 30 ग्रामों का चयन आयुष ग्राम योजना के लिए किया गया है, इनमें नरसिंहपुर जिले का ग्राम झामर शामिल है। अगले चरणों में प्रदेश के अन्य चयनित ग्रामों में इस योजना का विस्तार किया जायेगा।

       उल्लेखनीय है कि आयुष ग्राम योजना एक अवधारणा है, जिसमें चयनित ग्राम को आयुष जीवन शैली अपनाने तथा अभ्यास में लाने के लिए आयुष स्वास्थ्य परिचर्या और उपचार को अपनाया जायेगा। आयुष ग्राम में आयुष आधारित जीवन शैली का प्रचार- प्रसार किया जायेगा, इसे व्यवहार में लाकर अनुकरण किया जायेगा। स्थानीय औषधियों की पहचान कर उन्हें उपयोग में लाने के प्रयास किये जायेंगे। स्थानीय जड़ी बूटियों का संरक्षण एवं संवर्धन किया जायेगा। ग्रामीण समुदाय की आयुष ग्राम योजना में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जायेगी। आयुष ग्राम की कार्य योजना का क्रियान्वयन शासकीय स्वशासी आयुष महाविद्यालय जबलपुर और जिला आयुष अधिकारी के समन्वय से किया जायेगा।

       ग्रामीणों के स्वास्थ्य स्तर का रिकार्ड तैयार किया जायेगा। ग्राम में स्वास्थ्य सर्वे कराकर प्रत्येक परिवार के दो स्वास्थ्य पत्रक तैयार किये जायेंगे। एक पत्रक परिवार के मुखिया के पास और एक पत्रक आयुष विभाग द्वारा संधारित किया जायेगा। इसके विश्लेषण के आधार पर ग्राम स्वास्थ्य स्तर की रिपोर्ट तैयार की जायेगी। इसी के आधार पर गांव की स्वास्थ्य संबंधी भविष्य की कार्य योजना स्वास्थ्य शिविर, औषधी वितरण, योग शिविर आदि के कार्यक्रम निर्धारित किये जायेंगे। झामर में नियमित अंतराल पर आयुष शिविर और योगाभ्यास के कार्यक्रम होंगे। साथ ही राष्ट्रीय एवं अन्य स्वास्थ्य योजनाओं का क्रियान्वयन ग्रामवासियों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व आशा कार्यकर्ता के समन्वय से किया जायेगा।

       आयुष चिकित्सा पद्धतियों के बारे में जागरूकता बढ़ाई जायेगी, जिससे रोगों की रोकथाम करने तथा स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद मिले। आयुष ग्राम के लोगों को गांव के आसपास प्राप्त होने वाली औषधीय वनस्पतियों के महत्व को बताकर उनका संरक्षण व उपयोग को बढ़ावा देने के लिए प्रेरित किया जायेगा। औषधीय पौधों की खेती को बढ़ावा दिया जायेगा। कुपोषण, उच्च रक्तचाप, डायबिटीज जैसे असंचारी और मलेरिया, टीबी, डायरिया जैसे संचारी रोगों के विरूद्ध अभियान चलाकर उनकी रोकथाम और उपचार किया जायेगा।

       कार्यक्रम में ग्रामीणों को संबोधित करते हुए राज्य मंत्री श्री पटैल ने कहा कि आयुष प्रकृति के अनुरूप उपचार की सनातन व पुरातन व्यवस्था है। आयुष में आयुर्वेद, योग, यूनानी, सिद्ध एवं होम्योपैथी चिकित्सा पद्धतियां शामिल हैं। हमारा शरीर पंचतत्वों मिट्टी, जल, वायु, अग्नि व आकाश से मिलकर बना है। जब इन पंचतत्वों में असंतुलन होता है, तो बीमारी पैदा होती है। आयुष पद्धतियों से बीमारी का इलाज प्राकृतिक ढंग से किया जाता है, जिससे पंचतत्वों में संतुलन बना रहता है। केन्द्र एवं राज्य शासन ने आयुष के माध्यम से स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप लोगों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने का फैसला किया है।

       श्री पटैल ने कहा कि किसी भी व्यक्ति को नशा नहीं करना चाहिये। नशे के साथ बहुत सी बीमारियां आती हैं। नशे से परिवार, समाज, गांव, प्रदेश और देश का नुकसान होता है। इसके दुष्परिणाम भावी पीढ़ी को भुगतना पड़ते हैं। उन्होंने नशा मुक्ति के लिए प्रयास करने का लोगों से आग्रह किया। श्री पटैल ने कहा कि गांव में युवाओं और महिलाओं की टीम बनाकर लोगों को नशा मुक्ति के लिए प्रेरित किया जावे। उन्होंने बताया कि नशा छोड़ने के लिए होम्योपैथी पद्धति से उपचार कराया जा सकता है। राज्य मंत्री ने बताया कि झामर में वर्षभर स्थानीय लोगों के उपचार के लिए डॉक्टर आयेंगे और स्वास्थ्य एवं योग शिविरों का आयोजन यहां किया जायेगा।

       सांसद श्री राव उदय प्रताप सिंह ने कहा कि आयुष ग्राम योजना में झामर का चयन जिले की बहुत बड़ी उपलब्धि है। यह राज्य मंत्री श्री पटैल की पहल के कारण संभव हो पाया है। अब झामर मध्यप्रदेश के उन 30 ग्रामों में शामिल हो गया है, जहां आयुष ग्राम योजना क्रियान्वित की जा रही है। यह योजना ग्रामीणों के स्वास्थ्य की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी। इससे गांव- गांव में पारम्परिक चिकित्सा पद्धति को बढ़ावा मिलेगा और लोगों को सरलता से गांव में ही स्वास्थ्य सुविधायें मुहैया होंगी। श्री सिंह ने कहा कि आयुर्वेदिक, यूनानी एवं होम्योपैथी पद्धति से उपचार प्रकृति के अनुरूप है। आयुर्वेद से सभी प्रकार के रोग का उपचार किया जा सकता है। श्री सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के प्रयासों से पूरी दुनिया में योग के प्रति लोगों का रूझान बढ़ा है। योग करने से लोग निरोगी रह सकते हैं।

       जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी आरपी अहिरवार ने आयुष के महत्व को रेखांकित किया। उप संचालक आयुष डॉ. पीसी शर्मा ने आयुष ग्राम योजना के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि आयुर्वेद का मूल उद्देश्य स्वस्थ व्यक्ति के स्वास्थ्य की रक्षा करना और रोगी के रोग का उपचार करना है। इसमें आयुर्वेद के सिद्धांतों दिनचर्या, ऋतुचर्या, आहार- विहार आदि को अपनाने से हम अपने स्वास्थ्य को उत्तम बनाये रख सकते हैं। ठा. राजीव सिंह ने भी कार्यक्रम में अपने विचार रखे।

       कार्यक्रम का संचालन डॉ. भूपेन्द्र कुमार मिश्रा और आभार प्रदर्शन शासकीय आयुर्वेदिक महाविद्यालय जबलपुर के प्रधानाचार्य डॉ. रविकांत श्रीवास्तव ने किया।
इस अवसर पर जनपद अध्यक्ष अनुराधा पटैल एवं संतोष दुबे, उपाध्यक्ष अरविंद पटैल, धनीराम पटैल, राजकुमार जैन, शिव कुमार चौहान, सरपंच सीमा ठाकुर, मेर सिंह गुमास्ता, निधान सिंह पटैल, अखिल शंकर शर्मा, संजय तिवारी, त्रि- स्तरीय पंचायतों के पदाधिकारी, डॉ. रामकुमार अग्रवाल, डॉ. रविनारायण प्रजापति, जिला आयुष अधिकारी डॉ. उपेन्द्र धुर्वे और बड़ी संख्या में ग्रामीणजन मौजूद थे।

योगाभ्यास का प्रदर्शन
कार्यक्रम में शासकीय आयुर्वेद महाविद्यालय जबलपुर के छात्र- छात्राओं ने योग आसनों की विभिन्न मुद्राओं का शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने सूर्य नमस्कार, संगीत की धुन पर विभिन्न योगासन, प्राणायाम, योग पिरामिड, शीर्षासन, चक्रासन, पदमासन, सर्वांगासन आदि की आकर्षक प्रस्तुति दी, जिसे सभी ने सराहा।

औषधीय पौधों का रोपण
स्कूल परिसर में राज्य मंत्री श्री पटैल ने दंत रोग में उपयोगी बकुल का पौधा और सांसद श्री सिंह ने आंवले के औषधीय पौधा का रोपण किया।

औषधीय पौधों का वितरण
कार्यक्रम में अतिथियों और ग्रामीणों को औषधीय पौधों आंवला, गिलोय, नीम, पारिजात, अशोक, कचनार, सप्तपर्णी आदि का वितरण किया गया।

स्वास्थ्य शिविर का आयोजन
इस अवसर पर आयुर्वेदिक एवं होम्योपैथिक पद्धति से उपचार के लिए स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में मरीजों को आवश्यक चिकित्सीय परामर्श दिया गया और औषधियों का नि:शुल्क वितरण किया गया।

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