रेरा के अध्यक्ष विवेक ढांड द्वारा करोड़ों रुपए के जमीन हथियानें की कोशिश, इस पूरे कांड में सरकार के दबाव में मूक दर्शक बना है प्रशासन

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 ANI  NEWS INDIA  @ http://aninewsindia.com

विजया पाठक

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किसी समय में मध्य प्रदेश का अभिन्न अंग रह चुका छत्तीसगढ़ राज्य आज पूरी तरह से भ्रष्टाचार का प्रमुख गढ़ बनता जा रहा है। खास बात यह है कि इस राज्य में भ्रष्टाचार सरकार के उन अधिकारियों द्वारा किया जा रहा है जिनके जिम्में जनता की समस्याओं को दूर करना है।

इन अधिकारियों के कारनामों को सरकार पूरी तरह से मूक दर्शक बनी देख रही है। कार्यवाही तो दूर इनके द्वारा किए जा रहे भ्रष्टाचार और अनाचार की अब तक सही ढंग से पूरे मामलों की जांच भी नहीं की गई। देखा जाए तो अफसरों में भ्रष्टाचार का बीज कहीं न कहीं सरकार की ढ़िलाई से ही पनपता है। फिर चाहे वो भ्रष्ट अफसर राज्य के पूर्व मुख्य सचिव ही क्यों न रहा हो।

जी हां वर्तमान समय में भू-संपदा विनियामक प्राधिकरण (रेरा) के अध्यक्ष पद पर पदस्थ विवेक ढांड सरकार के लिए सपोले का किरदार अख्तियार किए हुए है। छत्तीसगढ़ के 1981 बैच के आईएएस रहे विवेक ढांड रमन सरकार में 2014-2018 तक मुख्य सचिव के पद पर रहे है। ढांड ने अपने पद के प्रभाव से कई प्रमुख और पॉश इलाकों की जमीनों को हथियाने की कोशिश की है।

दरासल विवेक ढांड ने 1992 में रायपुर शहर के सिविल स्टेशन वार्ड में डेढ़ लाख वर्गफीट से भी अधिक जमीन शासन से अवैध रूप से अपने माता-पिता, बहनों तथा स्वयं के नाम पर कब्जा कर उससे तीस साल के लिए लीज पर लिया था। लेकिन अब ढांड उसी जमीन को गुपचुप तरीके से हथियाने की कोशिश कर रहे है। इसके लिए उन्होंने हाल ही में अखबारों में इश्तेहार देकर दावा अपत्ति की उद्घोषणा तक कर डाली।

ढांड की इस पूरी कार्यशैली में शासन और सरकार दोनों ही महज तमाशबीन बने हुए है। इससे पहले भी विवेक ढांड पर एक हजार करोड़ रुपए से अधिक की राशि एक एनजीओ को ट्रांसफर करने का आरोप लगा हुआ है। इतना सब कुछ होने के बावजूद कार्यवाही न होना साफ इस बात की ओर इशारा करता है कि ढांड छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के काफी नजदीक है। दोनों की आपसी नजदीकियों से राज्य के लोग अच्छे खासे परिचित है। पहले तो विवेक ढांड ने रमन सरकार को मुख्य सचिव के पद पर रहते हुए निचौड़ा। उनका यह रवैया अभी भी भूपेश बघेल के कार्यकाल में जारी है।

रेरा के अध्यक्ष पद पर बैठ प्रमुख जमीनों को हथियाना मानो इनका प्रमुख पेशा बन गया है। इतना ही नहीं ढांड का राज्य सरकार के कामकाज में काफी दखल है। तभी तो भूपेश बघेल के कार्यकाल में भी आईएएस अफसरों की पद स्थापना में ढांड की मुख्य भूमिका होती है। किस अफसर और विभाग से कितना बजट इधर से उधर करवाना है सब विवेक ढांड के इशारे पर आज भी हो रहा है।

कुल मिलाकर भूपेश बघेल ढांड को पूरी तरह से संरक्षण दिए हुए है। यही वजह है कि उन्होंने अभी तक विवेक ढांड द्वारा की जा रही करोड़ों की जमीनों की हेराफेरी में कोई न्यायिक जांच के बारे में विचार तक नहीं किया है। राज्य को लगातार ढांड जैसे माफिया खोखला करते जा रहे है और भूपेश बघेल महज अपनी कुर्सी बचाने के लिए इधर से उधर गोटियां सेट करने में लगे हुए है। क्रमशः….


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