मध्य प्रदेश में खिलाड़ी नहीं अध्यक्ष-सचिव जमा रहे पंच खेलों के जानकार परमजीत सिंह को देख लेने की धमकी सैयां भये कोतवाल तो डर काहे का

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जबलपुर: मध्य प्रदेश में खेल संगठनों की लड़ाई खेलों को चौपट कर सकती है। पिछले एक-डेढ़ माह से संस्कारधानी जबलपुर में संगठन पदाधिकारियों के बीच जारी नूरा-कुश्ती कई तरह के सवाल खड़े कर रही है। ताजा मामला मध्य प्रदेश बॉक्सिंग संघ का है। मंगलवार को बाक्सिंग प्रशिक्षक परमजीत सिंह ने पुलिस अधीक्षक जबलपुर को सौंपे ज्ञापन में मध्य प्रदेश बाक्सिंग संघ के सचिव पर धमकी देने और नौकरी से निकलवाने की शिकायत की है।

पुलिस अधीक्षक को सौंपे ज्ञापन में बाक्सिंग प्रशिक्षक और सह-सचिव मध्य प्रदेश बाक्सिंग संघ परमजीत ने लिखा है कि 28 फरवरी को मध्य प्रदेश बॉक्सिंग संघ की साधारण सभा की बैठक जोकि नर्मदा क्लब सदर में आयोजित की गई थी उसमें मुझे जाने से रोका गया। मुझे साधारण सभा की बैठक की सूचना तक नहीं दी गई। जब इस बाबत मैंने मध्य प्रदेश बॉक्सिंग संघ के अध्यक्ष से शिकायत की तो सचिव द्वारा मुझे देख लेने की धमकी दी गई।

ज्ञातव्य है कि उस दिन सह सचिव परमजीत सिंह मध्य प्रदेश बाक्सिंग संघ के अध्यक्ष और सचिव के खिलाफ बैठक में अविश्वास प्रस्ताव रखने वाले थे। सह सचिव परमजीत का कहना है कि मध्य प्रदेश एमेच्योर बॉक्सिंग संघ में पिछले सात वर्षों से अध्यक्ष व सचिव फर्जी तरीके से कब्जा जमाए हुए हैं। अध्यक्ष व सचिव किसी भी जिले के सदस्य तक नहीं हैं। परमजीत ने अपने ज्ञापन में लिखा है कि मध्य प्रदेश बॉक्सिंग संघ सचिव दिग्विजय सिंह ने 2013 में ग्वालियर जिले से अपनी आमद दर्ज कराई थी तो 2017 से वह जबलपुर जिला सचिव बने हुए हैं।

दिग्विजय सिंह पर आरोप है कि वह फर्जी कागजों में जिला सदस्य बनकर मध्य प्रदेश बॉक्सिंग संघ पर कब्जा किए हुए हैं। खेल के जानकारों का कहना है कि दिग्विजय सिंह को मुक्केबाजी की एबीसीडी भी नहीं पता लेकिन अपने रसूख और दबदबे के चलते वह हर किसी को पंच जमाने की फिराक में रहते हैं। हाल ही दिग्विजय सिंह को भारतीय बॉक्सिंग संघ में कोषाध्यक्ष बनने का भी सौभाग्य प्राप्त हुआ है। खेल के विकास पर ध्यान देने की बजाय वह तिकड़मबाजी में लगे रहते हैं।

उन पर आरोप है कि उन्होंने मध्यप्रदेश में बॉक्सिंग के उत्थान पर कतई ध्यान नहीं दिया, यही वजह है कि प्रदेश के गिने-चुने जिलों में ही यह खेल सीमित होकर रह गया है, वह भी वहां की जिला इकाइयों के प्रयास से। मध्य प्रदेश के जिन 9-10 जिलों में यह खेल परवान भी चढ़ रहा है, उनमें किसी भी प्रकार का तालमेल नहीं है। देखा जाए तो मध्य प्रदेश में बॉक्सिंग मुख्यतः तीन जिलों भोपाल, ग्वालियर, इंदौर तक ही सिमट कर रह गई है।

परमजीत सिंह का कहना है कि मध्य प्रदेश बॉक्सिंग संघ के अध्यक्ष संजय सेठ का भी इस खेल से दूर-दूर तक वास्ता नहीं है। वह बॉक्सिंग खिलाड़ियों को सपोर्ट नहीं करते अलबत्ता प्रतियोगिताओं में मुख्य अतिथि बनकर जरूर कुर्सी की शोभा बढ़ाते हैं। बेहतर होता मध्यप्रदेश में बॉक्सिंग के गिरते स्तर को देखकर अधिक से अधिक जिलों के अध्यक्ष और सचिव से तालमेल कर इस खेल को प्राणवायु दी जाती। मध्य प्रदेश बॉक्सिंग संघ के सह सचिव परमजीत सिंह ने संगठन की शिकायत फर्म्स एण्ड सोसायटी जबलपुर से भी की है लेकिन उनकी बात को अब तक नजरअंदाज किया गया है। मध्यप्रदेश बॉक्सिंग संघ के सह सचिव परमजीत सिंह ने अब अध्यक्ष व सचिव के खिलाफ न्यायालय जाने का मन बना लिया है। खेलों का यह दुखद पहलू है कि जो व्यक्ति एक संगठन का काम सलीके से नहीं कर पा रहा है, वह अपने रसूख और दांव-पेंच से आधा दर्जन संगठनों की बागडोर सम्हाले हुए है। मध्य प्रदेश के खेल संगठनों में जो कुछ भी हो रहा है, उसे देखते हुए यही कहना ठीक होगा कि जब सैयां भये कोतवाल तो डर काहे का।


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