सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के जजों के रिटायरमेंट की उम्र बढ़ाने की कोई योजना नहीं

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कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने ये साफ किया है कि सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के जजों के रिटायरमेंट की उम्र बढ़ाने की कोई योजना नहीं है.

दरअसल, कई मीडिया रिपोर्ट्स में ये दावा किया जा रहा था कि सुप्रीम कोर्ट और 24 हाईकोर्ट के जजों की रिटायरमेंट उम्र 2 साल बढ़ाने के लिए एक संवैधानिक संशोधन विधेयक तैयार किया जा रहा है. ऐसे में जब इस बारे में कानून मंत्री से सवाल पूछा गया तो उन्होंने साफ-साफ कहा-‘नहीं’.

2010 में यूपीए लेकर आयी थी विधेयक

फिलहाल, सुप्रीम कोर्ट में जजों की रिटायरमेंट की उम्र 65 साल और हाईकोर्ट में 62 साल है.खबरों में विधि मामलों की संसदीय स्थायी समिति की रिपोर्ट के हवाले से कहा गया था कि सरकार रिटायरमेंट एज बढ़ाने का प्लान कर रही है. पिछली यूपीए सरकार साल 2010 में एक विधेयक लेकर आई थी जिसमें हाईकोर्ट के जजों की रिटायरमेंट की उम्र 62 साल से बढ़ाकर 65 साल करने का प्रस्ताव था, लेकिन 2014 में 15वीं लोकसभा के भंग होने के बाद ये विधेयक भी खत्म हो गया था. ये विधेयक लोकसभा में पेश किया गया था लेकिन इस पर कभी चर्चा नहीं हुयी.


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