सुप्रीम कोर्ट ने राम की जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद पर दिया अहम फैसला

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सुप्रीम कोर्ट ने राम की जन्मभूमि और बाबरी मस्जिद से जुड़े एक अहम मामले में 1994 के फ़ैसले पर पुनर्विचार से इनकार किया है. इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने इस्माइल फ़ारुक़ी मामले को पांच जजों की संवैधानिक पीठ के पास भेजने से भी इनकार कर दिया है. तीन जजों की पीठ ने 2-1 के बहुमत से यह फ़ैसला दिया गया है. इस मामले पर अपनी राय देते हुए कैबिनेट मंत्री उमा भारती ने कहा कि यह किसी भी तरह से धार्मिक टकराव का मसला है ही नहीं.

मीडिया को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि हिंदुओं के लिए यह राम की जन्मभूमि है. लेकिन मुस्लिम समुदाय के लिए यह कोई महत्वपूर्ण धार्मिक या कोई ऐतिहासिक महत्व की जगह नहीं है, क्योंकि उनका महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल तो मक्का-मदीना है, और ईसाइयों का वेटिकन सिटी है, इसी प्रकार हिंदुओं का राम का जन्मभूमि है. मीडिया से मुख़ातिब हुई उमा ने कहा कि यह कहीं से भी आस्था के टकराव का मसला था ही नहीं बल्कि इसे ऐसा बना दिया गया था और अब ये ज़मीन के विवाद में बदल गया है.

“अब अयोध्या में दो मामले सामने हैं. पहला कि यह ज़मीन आख़िर किसकी है. अब ज़मीन का मामला तो ऐसा है, कि इसे दोनों पक्ष कोर्ट के बाहर भी सुलझा सकते हैं. क़ानूनी रास्ते के साथ-साथ इसे बातचीत से भी सुलझाया जा सकता है. ” उन्होंने कहा, “ज़मीन विवाद मामले के अलावा दूसरा मामला 6 दिसंबर वाला भी है. जो लालकृष्ण आडवाणी पर है, मुरली मनोहर जोशी पर है और ख़ुद मुझ पर है. इसलिए जब भी इस तरह का कोई फ़ैसला आ जाता है, तो मैं ख़ुद आश्चर्य में पड़ जाती हूं कि कोई कैसे इसे साज़िश या षड्यंत्र से जोड़कर देख सकता है जबकि सब कुछ साफ़ साफ़ स्पष्ट है.” वहीं, बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा कि जहां राम का जन्म हुआ, वहां पूजा करना हिंदुओं का मौलिक अधिकार है, और क्योंकि बाबरी मस्जिद इस्लामी धर्म का एक अनिवार्य हिस्सा नहीं है, तो इसे स्थानांतरित किया जा सकता है और किसी दूसरी जगह पर उन्हें स्थान दिया जा सकता है.

मुंह में राम बगल में छुरी, मुंह में राम दिल में नाथूराम’

कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रियंका चतुर्वेदी ने अयोध्या मामले पर कहा कि कांग्रेस हमेशा से यह कहती आई है कि इस मसले पर सुप्रीम कोर्ट जो भी फ़ैसला करेगी, पार्टी उसका समर्थन करेगी. लेकिन सरकार को आड़े हाथ लेते हुए उन्होंने ये कहा कि ये तो दुर्भाग्य की बात है, कि मौजूदा सरकार पिछले 20 सालों से लगातार राम मंदिर के मुद्दे का राजनीतिक का इस्तेमाल कर रही है. प्रियंका ने अपने संबोधन में कहा कि बीजेपी एक पार्टी है, जो बोलती तो राम-राम है, लेकिन बगल में छुरी भी रखती है. उन्होंने कहा कि बीजेपी भगवान राम के नाम पर सिर्फ वोट बटोरती है. वहीं, एआईएमआईएम सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने भी इस फ़ैसले पर अपनी राय ज़ाहिर करते हुए कहा कि बतौर मुस्लिम वह यह कह सकते हैं कि मस्जिद इस्लाम का एक अभिन्न हिस्सा है, इसका ज़िक्र क़ुरान में है, हदीस में है.

उन्होंने कहा, “मैं सिर्फ़ एक अहम सवाल पूछना चाहता हूं कि अगर मस्जिद इस्लाम का ज़रूरी हिस्सा नहीं है तो बाकी धर्मों और धार्मिक जगहों का क्या, न्यायालय ये तय नही कर सकता है, कि किस धर्म के लिए क्या ज़रूरी है. “हालांकि, उन्होंने ये ज़रूर कहा कि अगर ये मामला पांच जजों की संवैधानिक बेंच देखती जो बेहतर होता लेकिन अब जबकि कोर्ट ने अपना फ़ैसला सुना दिया है, तो अब जब याचिकाएं सुनीं जाएंगी तो देखा जाएगा. आज सुप्रीम कोर्ट की बेंच के फ़ैसले के दौरान अदालत में वहां मौजूद वरिष्ठ पत्रकार जी. वेंकटेशन ने बीबीसी को बताया, “सुप्रीम कोर्ट ने राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मामले में मुसलमानों के एक पक्ष की अपील को ख़ारिज कर दिया है. इसमें मुसलमानों ने अपील की थी कि तीन जजों के ज़रिए सुने जा रहे मामले को पांच जजों की संवैधानिक पीठ को सौंपा दिया जाए. “तीन जजों की बेंच में शामिल चीफ़ जस्टिस दीपक मिश्रा और जस्टिस अशोक भूषण ने कहा कि यह केस राम मंदिर और बाबरी मस्जिद मामले से अलग है और मुख्य मामले पर इसका कोई असर नहीं होगा.

फिर तीसरे जज जस्टिस अब्दुल नज़ीर ने कहा कि इसे बड़ी बेंच के पास जाना चाहिए. जस्टिस नज़ीर ने ये भी कहा कि मैं अपने साथी जजों की राय से सहमत नहीं हूं. अदालत ने राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद के ज़मीन विवाद पर कहा कि टाइटल सूट को आस्था से जोड़ा न जाए. कोर्ट ने कहा कि 1994 का फ़ैसला ज़मीन अधिग्रहण के संदर्भ में था. अदालत ने कहा था कि राज्य किसी भी धार्मिक स्थल का अधिग्रहण कर सकता है, और ऐसा करने में संविधान का उल्लंघन नहीं माना जायेगा. सुप्रीम कोर्ट के इस फ़ैसले के बाद मुख्य मामले की सुनवाई का रास्ता साफ़ हो गया है. कोर्ट ने कहा है कि राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद में टाइटल सूट पर 29 अक्तूबर से शुरू के हफ़्ते में सुनवाई होगी.

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