भाजपा के पूर्व प्रदेशध्यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान ने टोल कर्मी को पहले पिटवाया, फिर खुद पीटा, टोलकर्मी डर के साये मे

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ANI NEWS INDIA @ http://aninewsindia.com

घटना के तीन वीडियो हुए वायरल, मारपीट करते दिखाई दे रहे हैं नंदकुमार चौहान

शिवपुरी जिला मुख्यालय से लगभग 30 किमी दूर स्थित पूरनखेड़ी टोल प्लाजा पर उस समय हंगामा खड़ा हो गया। जब यहां से गुजर रही भाजपा के पूर्व प्रदेशध्यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान की कार को टोल कर्मियों ने टोल चुकाने के लिए रोक लिया। बताया जाता है कि पूर्व प्रदेशध्यक्ष के साथ गाडिय़ां का काफिला था और इस काफिले के टोल कर्मियों ने न सिर्फ रोका बल्कि इन्हें टोल चुकाने के लिए नसीहत भी दे डाली। 

इसी बात को लेकर टोल कर्मियों और भाजपा नेताओं के बीच मुंहबाद हुआ। टोल प्लाजा पर मुंहबाद से शुरु हुआ यह विवाद देखते ही देखते मारपीट में तब्दील हो गया और स्थिति यह बनी कि पूर्व प्रदेशध्यक्ष व उनके साथ मौजूद भाजपाईयों एवं सुरक्षा गार्डो ने टोल प्लाजा पर पदस्थ कर्मचारियों के साथ जमकर मारपीट कर डाली। इस मामले में पूर्व प्रदेशध्यक्ष और भाजपाईयों ने सत्ता के मद में चूर होकर टोल प्लाजा पर जमकर हंगामा करते हुए रौंव झाड़ा।

यह घटना टोल प्लाजा पर लगे सीसीटीव्ही कैमरों में रिकार्ड हुई है। जिसमें प्रदेशध्यक्ष खुद व उनके साथ मौजूद लोग टोल कर्मी के साथ जमकर मारपीट कर रहे है। जो वीडियों सामने आया है उसमें साफ दिखाई दे रहा है कि मारपीट शुरु होने के बाद टोल कर्मचारी नंदकुमार चौहान के हाथ पैर जोड़कर उनसे माफी मांग रहे है। लेकिन टोल कर्मियों के निवेदन का सत्ता के मद में चूर नंदकुमार चौहान पर कोई असर नहीं पड़ा और उन्होंने निवेदन कर रहे टोल कर्मियों की कोई भी बात न सुनते हुए मारपीट शुरु कर दी।

हालांकि इस मामले की किसी भी तरह की कोई भी पुलिस शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है। यह बतादें कि नंदकुमार चौहान आज शिवपुरी दौर के बाद वापस लौट रहे थे और उसी समय यह घटना घटित हुई है। यहां बतादें कि आगामी 9 अक्टूबर को शिवपुरी में होने वाले भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के दौरे की व्यवस्थाओं का जायजा लेने एवं पार्टी पदाधिकारियों की बैठक लेने के लिए पूर्व प्रदेशध्यक्ष और सांसद नंदकुमार सिंह चौहान शिवपुरी आए हुए थे।

मारपीट के इस मामले में टोल प्रबंधन का कहना है कि उनके दो कर्मचारी घायल हुए है। हालांकि एकाएक घटित हुई इस घटना से टोल पर मौजूद सभी कर्मचारी इतना भयभीत हो गए कि वे घटना को अंजाम देने वाले लोगों की पहचान जानने के बाद भी उनका नाम तक लेने का साहस नहीं जुटा पाये।

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