जनसंपर्क/माध्यम से श्री एस.के.मिश्रा व मुख्यमंत्री के भांजी दामाद आशुतोष प्रताप सिंह को प्रदेश में निष्पक्ष चुनाव हेतु चुनाव आयोग तत्काल प्रभाव से हटाए : के.के. मिश्रा

Spread the love

*भाजपा का समानांतर कार्यालय बन चुके जनसंपर्क/माध्यम से श्री एस.के.मिश्रा व मुख्यमंत्री के भांजी दामाद श्री आशुतोष प्रताप सिंह को प्रदेश में निष्पक्ष चुनाव हेतु चुनाव आयोग तत्काल प्रभाव से हटाए या इन उपक्रमों को मतगणना तक स्वयं अधिग्रहित करे – के.के.मिश्रा*

*अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सदस्य के.के.मिश्रा ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त श्री ओ.पी.रावत एवम राज्य के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी श्री कांताराव को भेजी एक प्रामाणिक शिकायत में भारत निर्वाचन आयोग की मंशाओं के अनुरूप म.प्र.में 28 नव.को विधान सभा के होने जा रहे चुनाव में निष्पक्ष मतदान और लोकतंत्र के इस पवित्र अनुष्ठान में लोकतंत्र के चौथे महत्वपूर्ण स्तम्भ “मीडिया” की साख,सम्मान व गरिमा को अक्षुण्य रखने के लिए जनसम्पर्क विभाग के प्रमुख सचिव श्री एस.के.मिश्रा व संचालक श्री आशुतोष प्रताप सिंह को तत्काल प्रभाव से हटाए जाने की मांग की है*।
*बुधवार को आयोग को भेजी अपनी लिखित शिकायत में मिश्रा ने कहा कि पिछले कई सालों से जनसंपर्क/माध्यम जैसे महत्वपूर्ण उपक्रम अपने वैधानिक दायित्वों से इतर सरकार की अपेक्षा भाजपा-मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह चौहान की व्यक्तिगत ब्रांडिग का माध्यम बने हुए हैं।विपक्ष की आवाज़/उनकी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को सत्ता व राजनैतिक शक्तियों की आड़ में दुरूपयोग कर उसे दबाना आदि जैसे अनैतिक कृत्यों की भी यह उपक्रम मंडी बन चुके हैं। इसके लिये कई सौ करोड़ रु.के जनधन की बर्बादी भी की जा चुकी है।भाजपा,आरएसएस और इसके सभी अनुषांगिक संगठनों की लगभग सभी सम्पन्न बैठकों,सभाओं,सम्मेलनों से सम्बद्ध अन्य सभी व्यवस्थाओं,कार्यक्रमों की प्रचार-प्रसार सामग्री,पोस्टर्स,पम्प्लेट्स,विज्ञापनों आदि का भी करोड़ों रु.का भुगतान भी यहीं से हो रहा है*।
*इन दोनों ही उपक्रमों को प्रमुख सचिव के रूप में मुख्यमंत्री जी के अतिनिकट/सबसे विश्वस्त आयएएस श्री एस.के.मिश्रा का नियंत्रण प्राप्त है।श्री मिश्रा से मुख्यमंत्री जी की नज़दीकियों का अहसास इसी तथ्य से लगाया जा सकता है कि कुछ माह पूर्व उनके सेवानिवृत होने के पहले ही अन्य योग्य अधिकारियों को अपमानित -उनके अधिकारों का हनन करते हुए शासकीय नियमों को बला-ए-ताक रख उन्हें शिथिल/परिवर्तित कर उन्हें “प्रमुख सचिव” के रूप में ही पुनः उन्हीं महत्वपूर्ण दायित्वों के साथ नवाज़ दिया गया।ऐसा क्यों और किसलिए किया गया*?
*बात यहीं खत्म नहीं होती है, आसन्न विधानसभा चुनाव को दृष्टिगत रखते हुए मुख्यमंत्री जी ने कुछ वर्षों पूर्व पीएससी परीक्षा में योग्य प्रतिभागियों को दरकिनार कर डिप्टी कलेक्टर के पद पर चयनित होकर सुर्खियों में आई उनकी सगी भानजी सुश्री ऋतु चौहान के आईपीएस पति श्री आशुतोष प्रताप सिंह को भी 6 माह पूर्व संचालक, जनसंपर्क के रूप में तैनात कर दिया गया ताकि श्री मिश्रा के साथ-साथ श्री सिंह इन उपक्रमों के करोड़ों रु.के जनधन का दुरुपयोग सत्ता,मुख्यमंत्री,भाजपा,संघ व इनके अनुषांगिक संगठनों के हितों में करते हुए इनकी राजनैतिक ताकतों में इज़ाफ़ा करते रहें । आचार-संहिता लागू हो जाने के बाद भी यह हो रहा है ! इन परिस्थितियों में मुख्यमंत्री जी के विश्वस्त और सगे भानजी दामाद जैसे अधिकारियों के कारण प्रदेश में आयोग की मंशाओं,आदर्श आचार संहिता का सम्मान व निष्पक्ष निर्वाचन असंभव है।भारतीय प्रशासनिक-पुलिस सेवाओं से जुड़े ये दोनों हीं अधिकारीगण अपने रसूखों-मुख्यमंत्री जी से अपनी घोषित निकटताओं का बेजा लाभ लेकर विभिन्न जिलों में भी अन्य अधिकारियों पर सत्ता के पक्ष में काम करने का दबाव बना रहे हैं,जो उक्त उल्लेखित आशंकाओं को प्रमाणित करता है।लिहाज़ा, आग्रह है कि इन दोनों ही अधिकारियों को इनके दायित्वों से तत्काल प्रभाव से मुक्त किया जाए अथवा मतगणना दिवस तक चुनाव आयोग इन दोनों हैं उपक्रमों को स्वतः अधिग्रहित करे*।
*मिश्रा ने अपनी शिकायत में इस प्रासंगिक उल्लेख को भी रेखांकित किया है कि इन दोनों ही उपक्रमों में गत वर्षों हुए करोड़ों रु.के भ्रष्टाचार/अनियमितताओं की दस्तावेजी शिकायतों की जांच न्यायालयों के निर्देशों पर जांच एजेंसियों द्वारा की जा रही है किंतु इन प्रभावी अधिकारियों के दबावों के कारण सच्चाई को सामने नहीं आने दिया जा रहा है*।
*आयोग अपने स्तर पर भी यदि इन आरोपों की जांच भी करवाये तो सच्चाई सामने आ सकती है*।


Spread the love

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *