इन जिलों का नाम नरेन्द्र मोदीपुर और अमित शाह नगर कर दीजिये : जस्टिस काटजू

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वाराणसी. उत्तर प्रदेश सरकार बनने के बाद यूपी में शहरों के नाम बदलने का सिलसिला चल निकला है। सरकार आते ही कैबिनेट की बैठक में फैसला हुआ कि मुगलसराय का नाम बदलकर पं. दीन दयाल उपाध्याय के नाम पर रखा जाएगा।

विरोध और हंगामे के बावजूद सरकार ने नाब बदल दिया। रॉबर्टसगंज स्टेशन का नाम बदला और अब बारी इलाहाबाद की है, जिसका नाम बदलकर प्रयागराज करने जा रही है सरकार। सियासत से लेकर एनजीओ तक ऐसे लोगों की कमी नहीं जो सरकार के इस फैसले के खिलाफ हों। पूर्व जस्टिस मारकंडेय काटजू ने तो एक लिस्ट टि्वटर जारी कर दी है और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को इलाहाबाद का नाम बदले जाने की कवायद पर बधाई देते हुए कहा है कि डियर योगी जी अब इन जिलों के नाम भी बदल दीजिये। इसमें से एक जिले का नाम तो बदलकर नरेन्द्र मोदीपुर और एक का अमित शाह नगर करने का प्रस्ताव दिय है।

काटजू ने यह लिस्ट मुख्यमंत्री के इलाहाबाद का नाम बदलने के फैसले पर तंज करते हुए टि्वट की है और अपने वेरिफाइड फेसबुक एकाउंट से पोस्ट किया है। उनकी लिस्ट में सारे जिले उत्तर प्रदेश के हैं। इसमें पूर्वांचल के चार जिले हैं। लिस्ट के मुताबिक उन्होंने फतेहपुर का नाम बदलकर अमित शाह नगर करने का प्रस्ताव दिया है जबकि, गाजीपुर का नाम गणेशपुर, आजमगढ़ का नाम अलकनन्दापुर और मिर्जापुर का मीराबाई नगर करने का प्रस्ताव दिया है।

इसके अलावा उनकी लिस्ट के मुताबिक फैजाबाद का नाम बदलकर नरेन्द्र मोदीपुर, अलीगढ़ का अश्वात्थामा नगर, आगरा का अगसत्यानगर, मुजफ्फरनगर का मुरली मनोहर नगर, हमीरपुर का हस्तिनापुर, लखनऊ का लक्ष्मनपुर, बुलन्द शहर का बजरंगबलीपुर, गाजियाबाद का गजेन्द्र नगर, फिरोजाबाद का द्रोणाचार्य नगर, फर्रुखाबाद का अंगदपुर, गाजियाबाद का घटोत्कच नगर, सुल्तानपुर का सरस्वती नगर, मुरादाबाद का मन की बात नगर करने का प्रस्ताव दिया है।

बताते चलें कि नाम बदलने को लेकर अखिलेश यादव ने भी सरकार पर निशाना साधा है। अखिलेश यादव ने इसे परम्परा और आस्था के साथ खिलवाड़ करार दिया। सपा प्रमुख ने ट्वीट कर योगी आदित्यनाथ सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने लिखा है, ‘राजा हर्षवर्धन ने अपने दान से ‘प्रयाग कुम्भ’ का नाम किया था और आज के शासक केवल ‘प्रयागराज’ नाम बदलकर अपना काम दिखाना चाहते हैं। इन्होंने तो ‘अर्ध कुम्भ’ का भी नाम बदलकर ‘कुम्भ’ कर दिया है। ये परम्परा और आस्था के साथ खिलवाड़ है।’ कांग्रेस ने भी उनके इस फैसले पर विरोध का इजहार किया है।

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