यूपीए का राफेल सौदा रद्द नहीं करते पीएम, तो वायुसेना पायलटों को नहीं भेजना पड़ता जगुआर के कब्रिस्तान: राहुल

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कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा कि मोदी सरकार का ध्यान यूपीए शासन काल के रक्षा सौदे को अंतिम रूप देने से ज्यादा इसे दोबारा तय करने पर था, जिस वजह से भारतीय वायुसेना (आईएएफ) के पायलटों की जिंदगी खतरे में पड़ गई, क्योंकि वे पुराने विमानों को उड़ाने के लिए बाध्य हैं।

राहुल गांधी ने फेसबुक पोस्ट के जरिए कहा, “2014 के बाद से, कांग्रेस की अगुवाई वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार के सौदे को अंतिम रूप देने के स्थान पर मौजूदा सरकार ने सिर्फ अपने उद्योगपति दोस्तों को फायदा पहुंचाने के लिए सौदे को दोबारा तय करने पर ध्यान केंद्रित किया।”

उन्होंने आगे कहा, “और इसलिए हमारे पायलटों को प्रत्येक दिन अपनी जान को जोखिम में डालना पड़ता है। उन्हें पुराने जगुआर को उड़ाना पड़ता है, जिसे फ्रांस और विश्व के अन्य भागों के जंक यार्डो में इसके कुछ पार्ट्स के दोबारा प्रयोग के लिए रखा जाता है।” उन्होंने कहा, “यह न केवल शर्मनाक है, बल्कि इससे भारत की प्रतिष्ठा पूरे विश्व में धूमिल होती है। इस वजह से हमारे पायलट की जान को खतरा उत्पन्न होता है।”

यूपीए कार्यकाल के समय राफेल सौदे की तारीफ करते हुए राहुल गांधी ने कहा, “यूपीए कार्यकाल में 126 राफेल विमानों के लिए किए गए सौदे को आगे बढ़ाने से भारतीय वायुसेना का कायाकल्प हो जाता और हम जगुआर जैसे पुराने विमानों को बदलने में सक्षम होते। उस सौदे में एचएएल को तकनीक हस्तांतरित किया जाना था, ताकि हम भविष्य में ज्यादा आत्मनिर्भर हो सकें।”

कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, “इसके बदले अनिल अंबानी को फायदा पहुंचाने के लिए सौदे को दोबारा तय किया गया और इसे घटाकर केवल 36 विमानों तक सीमित कर दिया गया, जो सभी फ्रांस में बनेंगे। इन विमानों को भारत में आने में वर्षो का समय लगेगा।”

इसके अलावा राहुल गांधी ने ट्वीट कर पीएम मोदी पर हमला बोला। उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री को घोर भ्रष्टाचार की वजह से दुनिया के सर्वश्रेष्ठ पायलटों को भारत में बने विमानों के बजाए फ्रांस में बने जगुआर पर निर्भर रहना पड़ रहा है।”

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