बिल गेट्स ने बनाया ‘भविष्य का टॉयलेट’, न सीवर की जरूरत, न होगी पानी की

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बीजिंग। सॉफ्टवेयर कंपनी माइक्रोसॉफ्ट के संस्थापक बिल गेट्स ने अभिनव प्रयोग कर सव्छ्ता और सफाई के क्षेत्र में क्रांति ला दी है। बिल एंड मेलिंडा गेट्स ने एक ऐसा टॉयलेट तैयार किया है जिसमें न तो पानी की जरुरत होगी न ही सीवर लाइन तक संपर्क पाइप की जरुरत पड़ेगी। इसे भविष्य का एक तरफ जहां भारत सरकार देश में स्वच्छता पर अरबों रुपए खर्च कर रही है, वहीं बिल गेट्स की इस पहल से भारत जैसे कई देशों को बहुत लाभ होने की उम्मीद है।

भविष्य का टॉयलेट

मंगलवार को माइक्रोसॉफ्ट के संस्थापक बिल गेट्स पड़ोसी देश चीन में आयोजित टॉयलट एक्सपो में पहुंचे। इस बार उनके पास कोई सॉफ्टवेयर नहीं भविष्य का टॉयलेट था। इस टॉयलेट में कई अनोखी खूबियां हैं। इस टॉयलट में पानी या सीवर की आवश्यकता नहीं होती। इसमें कुछ रसायनों का प्रयोग किया जाता है जिसे वह मानव अपशिष्टों को उर्वरक में बदल देता है। इससे इस टॉयलेट में मल निस्तारण की भी चिंता नहीं होगी। इससे लोगों को बीमारियों से बचाने में मदद मिलेगी। बिल एंड मिलिंडा गेट्स फाउंडेशन के सहयोग से बने इस टॉयलट की खूबियों के बारे में बोलते हुए बिल गेट्स ने कहा कि दुनिया के विकसित देशों में पर्याप्त और सुरक्षित टॉयलट नहीं हैं।

खर्च हुए 1500 करोड़

भविष्य के टॉयलेट के बारे में बोलते हुए गेट्स ने कहा कि वह दुनिया को ऐसा साफ-सुथरा समाज देना चाहते हैं, जहां लोगों को गंदगी से होने वाली समस्याओं से बचाया जा सके। उन्होंने बताया कि बीते सात साल में उन्होंने अपनी संस्था की मदद से स्वच्छता शोध पर 1500 करोड़ रुपए खर्च किए हैं।

हानिकारक है पारम्परिक टॉयलेट

बिल गेट्स ने बताया कि एक साधारण टॉयलट में तकरीबन 20 लाख करोड़ रोटावायरस, 2 हजार करोड़ शिगेला जीवाणु और परजीवी कीड़ों के लगभग 1 लाख अंडे पाए जाते हैं। गेट्स ने कहा कि इससे यह साबित होता है कि ये पारंपरिक टॉयलेट हानिकारक और असुरक्षित है। गेट्स ने 400 ऐसे तरीकों के बारे में बताया, जिससे टॉयलेट को जीवाणुरहित और सुरक्षित बनाया जा सकता है।

भारत के उपयोगी है भविष्य का टॉयलेट

बिल गेट्स का यह अनोख टॉयलेट भारत जैसे देशों के लिए बेहद उपयोगी है। बता दें कि केंद्र सरकार ने 2 अक्टूबर 2019 को महात्मा गांधी की 150वीं वर्षगांठ पर ग्रामीण भारत में 1.2 करोड़ शौचालयों का निर्माण करने का लक्ष्य रखा है। इस पर खर्च होने वाली अनुमानित लागत 1.96 लाख करोड़ रुपए है। भारत जैसे देश जो साफ़ सफाई और स्वच्छता की समस्याओं से जूझ रहे हैं,उनके लिए इस तरह के शौचालय बेहद लाभकारी और किफायती साबित हो सकते हैं।

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