आचार्य श्री विद्यासागर जी ने दी मुनि दीक्षा, नितेंद्र अब मुनि श्री 108 निराश्रव सागर के नाम से जाने जाएगें

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ANI NEWS INDIA @ http://aninewsindia.com

जिला ब्यूरो चीफ, जिला नरसिंहपुर // अरुण श्रीवास्तव : 91316 56179

नरसिंहपुर । स्थानीय निवासी नितेंद्र जैन  अब मुनि श्री 108 निराश्रव सागर के नाम से जाने जाएंगे विगत दिवस उत्तर प्रदेश के ललितपुर में आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज ने उन्हें मुनि दीक्षा देकर नितेंद्र जैन की जगह अब निराश्रव  सागर मुनि के नाम से नामांकित किया नितेंद्र जैन  का जन्म नरसिंहपुर में 28 अप्रैल 1981 को एक जैन परिवार में हुआ था.

पिता तुलसीराम जैन माता प्रेमलता जैन के यहां पुत्र के रूप में जन्म लेने पर परिवार में बड़ी ही खुशियों का आगमन हुआ था बाल्यकाल से ही सरल स्वभाव मिलनसार एवं धर्म प्रेमी होने के कारण उनकी धार्मिक आस्था बढ़ती गई और  आज मुनि श्री निराश्रव  सागर की उपाधि से नवाजे गए नितेंद्र बचपन से ही खेलकूद और शिक्षा में निपुण रहे उनकी प्राथमिक शिक्षा नरसिंहपुर में ही संपन्न हुई एवं स्नातक व स्नातकोत्तर की शिक्षाएं भी स्थानीय पीजी कॉलेज नरसिंहपुर में ही की बचपन से ही धर्म के संस्कार मिलते रहे

पिता श्री टीआर जैन शासकीय विभाग में वरिष्ठ लेखाकार के पद पर रहे और सरल एवं शांत स्वभाव के हैं और माता श्रीमती प्रेमलता देवी अत्यंत धार्मिक एवं व्रतधारी महिला हैं इसलिए नितेंद्र भी सरल शांत एवं धार्मिक व्यक्ति रहे पर उनकी जीवन में एक घटना ने उन्हें और उनके परिवार को झकझोर दिया जिससे उनके जीवन में नया बदलाव आया सन 2005 में उन्हें एक बीमारी क ा नागपुर में इलाज कराने पर पता चला है उन्हेेंं कैंसर है परिवार के लोगों ने निर्णय लिया कि मुंबई में इलाज कराएंगे वहां भी डॉक्टर ने उन्हें कैंसर बताया और इलाज प्रारंभ हुआ उन्हें कीमोथेरेपी दी गई उनके शरीर के पूरे बाल झड़ गए

शांत स्वभाव  के होने के कारण  उन्होंने रोग को शांति से झेला उसी समय कंदेली दिगंबर जैन मंदिर में आचार्य श्री विद्यासागर जी की परम शिष्या 105 आर्यिका श्री अनंत मति माताजी का चतुर्मास चल रहा था उनउपकारी माताजी ने अपनी दया दिखाते हुए आशीर्वाद दिया और उनसे कहा कि आप वीना बाराह सागर देवरी में आचार्य श्री विद्यासागर जी का चतुर्मास चल रहा है आप वहां जाकर उनसे मिले उनके दर्शन करें और वह सपरिवार उनके दर्शन करने गए तब आचार्य श्री जी ने कहा कि आप रात्रि में चारों प्रकार के आहार का त्याग करें  यहां तक कि आज दवाई में भी शाम 7: बजे के पहले सेवन करें यह रात्रि भोजन त्याग करना ही औषधि है

भैया जी इस  नियम का पालन के साथ 5 साल के लिए ब्रह्मचर्य व्रत भी लिया और उन्होनें नियमों का दृडता से  पालन भी किया  उसके बाद 8 नवंबर को उनका ऑपरेशन मुंबई में हुआ और ऑपरेशन में एक गांठ निकली उसकी जांच तो उसमें कैंसर  का रोग निकला ही नहीं यह चमत्कार आचार्य श्री के आशीर्वाद से हुआ यह जीवन आचार्य श्री की ही देन है तो उन्होंने अपना जीवन आचार्य श्री विद्यासागर जी के चरणों में अर्पित कर दिया और दिगंबरी दीक्षा धारण कर ली और संयम के पथ को धारण कर नितेंद्र जैन से बन गए मुनि निराश्रव सागर 15 जुलाई 2015 को आचार्य श्री अजीवन ब्रह्मचर्य व्रत लिया एवं 1 जुलाई 2016 को गृह त्याग कर मुनि श्री निराश्रव सागर जी सत्संग के सानिध्य में रहे

बुधवार 28 नवंबर 2018 को ब्रह्मचारी नितेंद्र जैन को आचार्य श्री विद्यासागर जी ने मुनि की  दीक्षा दी और उन्हें नया नाम मुनि निराश्रव सागर दिया गुरुवार को मुनि निराश्रव सागर के रूप में उनकी प्रथम आहार चर्या हुई नरसिंहपुर से सागर जी पहले मुनि है इसके पहले माता श्री 105 आर्यिका श्री अनंतमूर्ति माताजी एवं 105 आर्यिका श्री शाश्वतमति जी है जो आचार्य श्री की ही शिष्या है उनकी दीक्षा से समस्त नरसिंहपुर जैन समाज अत्यंत हर्ष है

और मुनि आचार्य श्री और मुनि श्री के आगमन की प्रतीक्षा में है उक्त जानकारी जैन समाज के धर्मालंबी नितिन जैन द्वारा दी गई एवं समस्त जैन समाज में श्री नितेंद्र जैन को मुनि श्री बनने पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं प्रेषित की गई एवं समस्त समाज को उनके आगमन का इंतजार है और उन से निवेदन है कि वह आकर समाज के समस्त लोगों को कल्याण हेतु अपना आशीर्वाद प्रदान करें ।

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