खनिज कारोबार को सहेजने, संजय पाठक बदल सकते हैं पाला फिर हो सकते हैं कांग्रेस में शामिल

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भोपाल । भाजपा के विजयराघवगढ़ से विधायक एवं पूर्व राज्यमंत्री संजय पाठक फिर से पाला बदलकर कांग्रेस में शामिल हो सकते हैं। उनकी कई स्तर पर चर्चाएं भी हो चुकी हैं। उन्होंने विधानसभा में अध्यक्ष एनपी प्रजापति से भी बंद कमरे में गुफ्तगू की है। इसके बाद ऐसे कयास लगाए जा रहे हैं कि वे जल्द ही भाजपा से इस्तीफा दे सकते हैं। संजय पाठक कांग्रेस छोड़कर ही भाजपा में शामिल हुए थे।

भाजपा के सबसे अमीर विधायकों में से एक संजय पाठक की वापसी कांग्रेस में हो सकती है। वे कांग्रेस के कई आला नेताओं के संपर्क में बताए जाते हैं। हालांकि वे कांग्रेस छोड़कर ही भाजपा में शामिल हुए थे और उपचुनाव में जीतकर मंत्री पद भी पाया था। संजय पाठक कई व्यवसायों से जुड़े हुए हैं। उनके खनिज, रिसोर्ट सहित कई अन्य काम-धंधे हैं।

उनके पिताजी स्व. सत्येंद्र पाठक भी कांग्रेस नेता रहे हैं। संजय पाठक ने भी अपनी राजनीतिक पारी कांग्रेस के साथ ही शुरू की थी। वे अपने छात्र जीवन से ही कांग्रेस की राजनीति कर रहे हैं। संजय पाठक वर्ष 1991 में जिला युवक कांग्रेस ग्रामीण जिला जबलपुर के महामंत्री बने। इसके बाद वर्ष 1996 में जिला कांग्रेस कमेटी कटनी के महामंत्री बनाए गए। वे वर्ष 2000 से 2005 में जिला पंचायत कटनी के अध्यक्ष रहे और 2008 में मप्र कांग्रेस के महासचिव बनाए गए।

पहली बार संजय पाठक 2008 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर ही निर्वाचित होकर सदन में पहुंचे। इसके बाद वे वर्ष 2013 के विधानसभा चुनाव में भी कांग्रेस के ही टिकट पर चुनाव जीते। हालांकि वर्ष-2013 में कांग्रेस पार्टी सरकार नहीं बना सकी। भाजपा पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में आई। संजय पाठक 31 मार्च 2014 को कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए। इसके बाद अगस्त-2014 में उपचुनाव कराए गए।

संजय पाठक भाजपा के उम्मीदवार बनाए गए और उपचुनाव में जीतकर भी आए। उन्हें भाजपा सरकार में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंत्रिमंडल में राज्यमंत्री बनाया। वे जून-2016 से नवंबर-2018 तक सूक्ष्म एवं लघु उद्योग विभाग के राज्यमंत्री रहे।

संजय पाठक ने एनपी प्रजापति के विधानसभा अध्यक्ष बनने के अगले दिन उनके साथ बंद कमरे में बैठकर चर्चा की है। बताया जा रहा है कि दोनों नेताओं के बीच कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई है।

विधायक संजय पाठक के तेवर भी कांग्रेस को लेकर नरम हैं। 15वीं विधानसभा के प्रथम सत्र में पहले दिन से ही भाजपा सत्ता पक्ष के खिलाफ मुखर है। भाजपा की यह मुखरता सत्र समाप्ति तक बनी रही। इस बीच भाजपा ने कई बार आसंदी के पास जाकर नारेबाजी की और कांग्रेस के खिलाफ मोर्चा खोला, लेकिन इस दौरान संजय पाठक या तो अपने स्थान पर बैठे रहे या वे सदन से बाहर चले गए। उन्होंने न तो कांग्रेस के खिलाफ और न ही विधानसभा अध्यक्ष के खिलाफ नारेबाजी की और न ही वे भाजपा विधायकों के साथ ज्यादा दिखाई दिए। हालांकि इस दौरान उनका झुकाव कई बार कांग्रेस के साथ दिखाई दिया। वे कई बार कांग्रेसी खेमे में मेल-जोल बढ़ाते हुए नजर भी आए।


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