अयोध्या : सरकार 67 एकड़ भूमि लौटाने को तैयार

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photo : नयी दिल्ली में राम मंदिर मुद्दे पर बात करते वक्त भावुक हुए विहिप के कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार।

नयी दिल्ली, लोकसभा की 2019 की चुनावी जंग के लिए अपने तरकश से लगातार सियासी तीर छोड़ रही मोदी सरकार ने गरीब सवर्णों के लिए आरक्षण के बाद अब अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को लेकर बड़ी पहल की है। सरकार ने अयोध्या में विवादास्पद राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद स्थल के पास अधिगृहीत 67 एकड़ जमीन उसके मूल मालिकों को लौटाने की अनुमति के लिए मंगलवार को सुप्रीमकोर्ट में अर्जी दायर की। अपनी पहल को सही ठहराते हुए केंद्र ने कहा कि वह अदालत के फैसले पर ही अमल कर रही है।

मोदी सरकार के इस कदम से राजनीति गरमा गई है। विश्व हिंदू परिषद ने इस फैसले का स्वागत किया है। वहीं, इस मुद्दे से जुड़े मुस्लिम पक्षकारों ने एतराज जताया है। मोदी सरकार ने यह पहल प्रयागराज कुंभ में संतों की बैठक से ठीक 2 दिन पहले की। विहिप से जुड़े संतों की उच्चाधिकार समिति मोदी सरकार को 31 जनवरी तक राम मंदिर निर्माण को लेकर संसद से कानून बनाने को लेकर अल्टीमेटम पहले ही दे चुकी है। माना जा रहा है कि साधु-संतों की नाराजगी से बचने के लिए मोदी सरकार ने नया कदम उठाया है।

नयी याचिका में सरकार ने कहा कि केंद्र ने 2.77 एकड़ विवादित राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद स्थल के पास 67 एकड़ भूमि का 1991 में अधिग्रहण किया था। अब वह इस अतिरिक्त जमीन को उसके मूल मालिकों को लौटाने की अनुमति चाहती है। गौर हो कि इस 67 एकड़ जमीन में से करीब 42 एकड़ का मूल मालिक ‘राम जन्मभूमि न्यास’ है। न्यास ने भी यह भूमि मूल मालिकों को वापस दिए जाने की मांग की थी। केंद्र ने इस्माइल फारुखी मामले का जिक्र किया है, जिसमें सुप्रीमकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि सरकार दीवानी मुकदमे पर इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के बाद विवादित भूमि के आसपास की अधिगृहीत 67 एकड़ भूमि उसके मालिकों को लौटाने पर विचार कर सकती है।

सही दिशा में कदम : विहिप

विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के अंतर्राष्ट्रीय कार्याध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा, ‘यह जमीन राम जन्मभूमि न्यास की है और यह किसी वाद में नहीं है। यह सही दिशा में उठाया गया कदम है।’

सरकार का फैसला संवैधानिक : जावड़ेकर

केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा सरकार का यह फैसला संवैधानिक है। उन्होंने मंगलवार को प्रेस काॅन्फ्रेंस में कहा कि अदालत की संवैधानिक बेंच ने ही कहा था कि सरकार को निर्णय करना है कि जो बाकी जमीन है उसका क्या किया जाए। इसलिए सरकार ने अब सुप्रीमकोर्ट से यथास्थिति के आदेश को बदलने का अनुरोध किया है। जावड़ेकर ने साफ किया कि सरकार चाहती है कि विवादित 0.313 एकड़ भूमि पर यथास्थिति बनी रहे। उसका कानूनी कामकाज और कोर्ट केस पहले की तरह चलता रहे। इसके अलावा भूमि के जिस हिस्से पर कोई विवाद नहीं है, सरकार उसे ही मूल मालिकों को वापस देना चाहती है।

सुप्रीमकोर्ट से मंजूरी मिलने के बाद राम मंदिर बनाने की दिशा में राम जन्मभूमि न्यास आगे बढ़ सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस राम मंदिर निर्माण में बाधा डालती रही है। राम जन्मभूमि न्यास ने 2003 में भूमि लौटाने की अपील की थी, लेकिन 10 साल सत्ता में रही कांग्रेस ने कुछ नहीं किया। उन्होंने कहा कि भाजपा का रुख साफ है कि मंदिर वहीं बने, भव्य बने, जल्दी बने।

तत्काल कार्य करने की अनुमति मिले : योगी

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि केंद्र की याचिका का हम स्वागत करते हैं। हमें गैर विवादित भूमि पर तत्काल कार्य करने की अनुमति मिलनी ही चाहिए।


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